M.Com पास युवक की अमरूद की खेती बनी मिसाल, 2000 पेड़ों से 1.2 करोड़ तक का टर्नओवर व्यापार एक घंटा पहले 2
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का एक M.Com पास युवा किसान अमरूद की तीन खास किस्मों की बागवानी से करोड़ों का टर्नओवर हासिल कर रहा है और कई लोगों को रोजगार भी दे रहा है।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का एक M.Com पास युवा किसान आज अपनी अनूठी बागवानी के बल पर सफलता की नई कहानी लिख रहा है। अमरूद की तीन खास किस्मों की खेती करके यह किसान न केवल करोड़ों का टर्नओवर कमा रहा है, बल्कि आसपास के कई लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी बन गया है।

पढ़ाई के बाद खेती में बनाई पहचान

बलिया जिले का यह M.Com पास युवक अब प्रदेश के एक चर्चित किसान के रूप में जाना जा रहा है। कम उम्र में ही इस युवा ने बागवानी के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है। हम बात कर रहे हैं युवा किसान प्रखर की, जिनकी प्रगति अब दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। दूर-दूर से लोग उनसे बागवानी की तकनीक सीखने पहुंच रहे हैं और उन्हें देखकर कई किसान भी बागवानी की ओर आकर्षित हुए हैं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है पढ़ाई

बलिया जनपद के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के आमदौर गांव निवासी युवा किसान प्रखर प्रशांत पांडेय ने बताया कि उनकी पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई है और उन्होंने M.Com की डिग्री पूरी की है। उन्हें शुरू से ही खेती से लगाव रहा है। बागवानी उनके पिता भी करते आ रहे हैं, लेकिन प्रखर इसे एक नया रूप देने में जुटे हुए हैं।

अमरूद की तीन खास किस्में

फिलहाल उन्होंने अपने बगीचे में अमरूद की कई किस्में लगा रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से पहली Kg1 (bnr), दूसरी थाई पिंक अमरूद (Thai Pink Guava) और तीसरी रेड डायमंड (Red Diamond) शामिल हैं। इस काम को बड़े पैमाने पर करने के लिए उन्होंने अहमदाबाद से बैग और फोपलेट (Fo-plate) भी मंगवाए हैं। उनके बगीचे में लगभग दो हजार अमरूद के पेड़ हैं और अच्छी देखभाल पर एक पेड़ से सौ किलो तक का उत्पादन लिया जा सकता है।

एक पेड़ से 6000 रुपए तक का टर्नओवर

प्रखर ने बताया कि यह अमरूद कम से कम 60 रुपए किलो की दर से बिकता है, यानी एक पेड़ से 6000 रुपए और दो हजार पेड़ों से 12,000,000 रुपए (एक करोड़ बीस लाख) तक का टर्नओवर संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि वह खेती से बेहद संतुष्ट हैं। दूसरे युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने के लिए बागवानी बहुत ही बेहतर विकल्प है। यह M.Com पास युवा किसान फिलहाल कई लोगों को रोजगार भी दे रहा है।

कई लोगों को मिल रहा रोजगार

निराई-गुड़ाई, मार्केटिंग, फलों की तुड़ाई और ई-रिक्शा जैसे तमाम कामों में यहां समयानुसार लोगों को रोजगार मिलता है। प्रखर ने बताया कि अभी वह जो रोजगार सृजित कर रहे हैं, वह आगे चलकर और ऊंचे स्तर पर पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि शुरू से ही उनकी सोच रही है कि किसी के अधीन नौकरी न करें, बल्कि दूसरों को रोजगार दें, और उन्हें विश्वास है कि उनका यह सपना जरूर पूरा होगा।

अधिकारी ने बागवानी को बताया बेहतर विकल्प

बागवानी का निरीक्षण करने पहुंचीं बलिया की जिला उद्यान अधिकारी अल्का श्रीवास्तव ने बताया कि बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं के लिए बागवानी एक बेहतर विकल्प साबित हो रही है। युवा बागवानी से कम मेहनत में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस किसान का बागवानी की ओर झुकाव सन 2000 से ही रहा है और वह लगातार प्रगति कर रहे हैं। यह किसान सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हुए एक विकसित किसान बनने का प्रयास कर रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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