रामपुर: एमएससी पास युवा ने लौकी की खेती से कमाया बंपर मुनाफा, नौकरी के साथ कर रहे हैं यह कमाल व्यापार 2 महीने पहले 72
रामपुर के रहने वाले एमएससी हॉर्टिकल्चर पास अब्दुल्ला ने वैज्ञानिक तरीके से लौकी की खेती कर मिसाल पेश की है। वे मचान विधि अपनाकर प्रति बीघा 60 क्विंटल उत्पादन और 80 हजार रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं।

खेती में अपनाया आधुनिक विज्ञान

रामपुर के खोद गांव के रहने वाले अब्दुल्ला ने साबित कर दिया है कि शिक्षा और आधुनिक तकनीकों का सही मेल खेती को भी मुनाफे का सौदा बना सकता है। एमएससी हॉर्टिकल्चर की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए उन्होंने खेती को कमाई का बड़ा जरिया बनाया है। उन्होंने करीब पांच बीघा जमीन पर वीएनआर हारुना किस्म की हाइब्रिड लौकी की खेती की है।

42 दिन में तैयार होती है फसल

अब्दुल्ला बताते हैं कि वीएनआर हारुना एक बेहद कम समय में तैयार होने वाली किस्म है। बीज बोने के महज 42 से 47 दिन के भीतर ही फसल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। इस किस्म के फल दिखने में बेलनाकार, हल्के हरे और आकर्षक होते हैं, जिसके कारण बाजार में इनकी काफी मांग रहती है। एक बार फसल लगाने के बाद यह अक्टूबर-नवंबर तक लगातार पैदावार देती है। वर्तमान में शुरुआती दौर में ही प्रति बीघा एक तुड़ाई में लगभग एक क्विंटल लौकी प्राप्त हो रही है।

मचान विधि का कमाल

खेती की उत्पादकता और गुणवत्ता सुधारने के लिए अब्दुल्ला ने मचान विधि का उपयोग किया है। इसमें पौधों को जमीन पर फैलाने के बजाय बांस और तारों के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है। इसके लाभ निम्नलिखित हैं:

  • बेलों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है।
  • पौधों में रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है।
  • फल साफ-सुथरे और बेहतर गुणवत्ता वाले प्राप्त होते हैं।

इस विधि को अपनाने के लिए करीब 30 हजार रुपये की अतिरिक्त लागत जरूर आई, लेकिन उत्पादकता में हुई भारी वृद्धि से यह खर्च आसानी से निकल जाता है। किसान के अनुसार, पूरे सीजन में प्रति बीघा 70 से 80 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा मिल जाता है।

बेहतर प्रबंधन से बेहतर परिणाम

अब्दुल्ला ने बताया कि इस खेती में पौधों के बीच 2 से 3 फीट और मेढ़ों के बीच 4 से 6 फीट की दूरी रखी गई है, जिससे पौधों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। वे पौधों की देखभाल के लिए संतुलित खाद और सिंचाई का विशेष ध्यान रखते हैं। आमतौर पर इस किस्म के फल दो किलो तक हो सकते हैं, लेकिन अच्छी गुणवत्ता और बाजार की मांग को देखते हुए वे एक किलो वजन होते ही फसल की तुड़ाई कर लेते हैं। उनकी मेहनत और वैज्ञानिक सोच का ही परिणाम है कि वे नौकरी के साथ खेती में भी सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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