हिमाचल प्रदेश
एक घंटा पहले
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हिमाचल में पेट्रोल और डीजल पर नया शुल्क
हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की कीमतों में एक बार फिर बदलाव किया है। राज्य सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए ईंधन पर 60 पैसे प्रति लीटर का 'अनाथ एवं विधवा सेस' लागू कर दिया है। सरकार का तर्क है कि इस नए शुल्क से जो राजस्व प्राप्त होगा, उसका उपयोग पूरी तरह से अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में किया जाएगा। हालांकि, इस फैसले के सार्वजनिक होते ही राज्य में सियासी घमासान शुरू हो गया है और विपक्षी दल इसे जनता की जेब पर एक और प्रहार मान रहे हैं।
बीजेपी का हमला और गंभीर आरोप
हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद से ही यह सरकार लगातार नए-नए कर और शुल्क लगाकर प्रदेश की आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। डॉ. बिंदल ने याद दिलाया कि सरकार बनने से पहले कांग्रेस ने जनता से बड़े-बड़े लुभावने वादे किए थे, लेकिन अब उन्हीं लोगों पर टैक्स का भारी बोझ डाला जा रहा है।
बीजेपी नेता ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश सरकार इससे पहले भी दो बार पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इस नए 60 पैसे प्रति लीटर के सेस के माध्यम से जनता से वसूली की जा रही है। उन्होंने विधानसभा सत्र का जिक्र करते हुए दावा किया कि जब इस संबंध में सरकार से सवाल पूछा गया था, तो मुख्यमंत्री ने सदन में यह आश्वासन दिया था कि यह केवल एक कानूनी प्रावधान है और इसे लागू करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। लेकिन, अब इसे लागू कर सरकार ने अपनी बात से पलटी मारी है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का तर्क
विपक्ष के हमलों और जनता के सवालों के बीच, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सामने आकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सेस का उद्देश्य केवल लोक कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन जुटाना है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी कम हैं। उन्होंने बताया कि इस नए सेस के लगाए जाने के बावजूद राज्य में ईंधन के दाम पड़ोसी राज्यों जैसे हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड की तुलना में लगभग 70 पैसे प्रति लीटर सस्ते रहेंगे।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सेस लगाने से पहले हिमाचल में पेट्रोल और डीजल की दरें पड़ोसी राज्यों के मुकाबले करीब सवा रुपये प्रति लीटर कम थीं। इसी मूल्य अंतर को व्यवस्थित करने के लिए सरकार ने 60 पैसे का मामूली सेस लगाने का निर्णय लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस राशि का प्रत्येक पैसा अनाथों और विधवाओं के उत्थान के लिए समर्पित होगा, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में बेहतर जीवन जी सकें।
विक्रमादित्य सिंह का बचाव
सरकार के इस कदम पर उठ रहे विवाद के बीच, प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी मोर्चा संभाला है। उन्होंने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि बीजेपी को सरकार पर सवाल उठाने से पहले यह आत्ममंथन करना चाहिए कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इतनी अधिक क्यों हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर कीमतों को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप मढ़ा है। मंत्री के अनुसार, राज्य सरकार का निर्णय पूरी तरह से जनकल्याण को समर्पित है, जिसे राजनीति से प्रेरित होकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
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