छोटा कार्ट, बड़ा स्वाद: ऋषिकेश में 'बॉस द शेफ' का नूल पराठा और ग्रेवी चाप बना चर्चा का विषय उत्तराखंड एक घंटा पहले 2
ऋषिकेश की हरिद्वार रोड पर मौजूद 'बॉस द शेफ' फूड कार्ट अपने नूल पराठा और ग्रेवी वाली चाप के अनोखे स्वाद और किफायती दामों के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। शेफ पवन सिंह पंवार सिर्फ ₹10 में नूल पराठा परोस रहे हैं।

ऋषिकेश में स्ट्रीट फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है और खाने के शौकीन नए-नए स्वादों की तलाश में अलग-अलग फूड पॉइंट्स की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में हरिद्वार रोड पर मौजूद “बॉस द शेफ” नाम का एक फूड कार्ट अपनी निराली डिशेज और कम कीमतों की बदौलत लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। इस कार्ट को चलाने वाले शेफ पवन सिंह पंवार अपने खास अंदाज और अनूठे मेन्यू से ग्राहकों को अपनी ओर खींच रहे हैं। यहां परोसा जाने वाला नूल पराठा और ग्रेवी वाली चाप लोगों को एक बिल्कुल अलग स्वाद का अनुभव करा रहे हैं।

नाम के पीछे की कहानी

शेफ पवन सिंह पंवार ने बातचीत में बताया कि उन्होंने अपने कार्ट का नाम “बॉस द शेफ” इसलिए रखा, क्योंकि वह स्वयं शेफ हैं और पूरी कुकिंग अपने हाथों से करते हैं। उनके मुताबिक इस नाम का सीधा-सा मतलब है कि जो बॉस है, वही शेफ है और वही ग्राहकों के लिए स्वादिष्ट भोजन तैयार करता है। यह नाम उन्हें सहज और सबसे जुदा लगा, इसलिए उन्होंने इसे ही अपने फूड कार्ट की पहचान बना लिया।

कहां स्थित है यह कार्ट

यह कार्ट हरिद्वार रोड पर छाबड़ा ब्रदर्स के आगे और छोटी सब्जी मंडी के ठीक सामने लगता है। आसपास से रोजाना बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता है, जिसके चलते यह जगह खाने के शौकीनों के लिए एक आसान ठिकाना बन गई है। राजस्थानी भोजनालय के नजदीक मौजूद यह कार्ट धीरे-धीरे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी अपनी पहचान बना रहा है।

कार्ट की सबसे बड़ी खासियत

“बॉस द शेफ” की सबसे बड़ी विशेषता यहां मिलने वाली ग्रेवी वाली चाप और नूल पराठा है। शेफ पवन का कहना है कि ग्रेवी वाली चाप बहुत कम जगहों पर मिलती है और इसका स्वाद लोगों को खूब भा रहा है। वहीं नूल पराठा इस कार्ट की सबसे खास डिश है। उनका दावा है कि पूरे उत्तराखंड में, यहां तक कि तपोवन जैसे लोकप्रिय इलाकों में भी इस तरह का नूल पराठा आसानी से देखने को नहीं मिलता। अपनी बनावट और तैयार होने की प्रक्रिया के कारण नूल पराठा बेहद खास माना जाता है।

कैसे बनता है “नूल” पराठा

पवन ने बताया कि “नूल” का अर्थ रस्सी होता है और इस पराठे को रस्सी जैसी संरचना देकर तैयार किया जाता है। इसे बनाने में दूध, दही, शुगर और नमक का इस्तेमाल किया जाता है। पूरी प्रक्रिया में काफी मेहनत और समय लगता है, फिर भी वह इसे ग्राहकों को महज ₹10 में उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बड़े रेस्टोरेंट्स में इसी तरह का पराठा ₹25 से ₹30 तक में बेचा जाता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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