उत्तर प्रदेश
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चंदौली के मुगलसराय इलाके के हिनौली गांव में पीने के पानी की किल्लत ने लोगों की दिनचर्या को बेहाल कर रखा है। जलापूर्ति के नाम पर गांव में पाइपलाइन तो डाल दी गई, मगर उन पाइपों में पानी कब बहेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जून की तपती गर्मी में ग्रामीण एक-एक बूंद के लिए इधर-उधर भटकने को विवश हैं, और इस परेशानी की सबसे बड़ी मार महिलाओं तथा बुजुर्गों पर पड़ रही है।
हर घर जल का सपना धरातल पर अधूरा
केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना का मकसद हर घर तक साफ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र के हिनौली गांव में यह योजना जमीन पर पूरी तरह नाकाम दिखती है। यहां लाखों रुपये की लागत से खड़ी की गई पानी की टंकी आज सिर्फ एक दिखावटी ढांचा बनकर रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी बने करीब डेढ़ से दो साल का वक्त गुजर चुका है, फिर भी आज तक किसी घर में जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई। नतीजतन कड़ी धूप के बीच लोगों को पानी जुटाने के लिए जूझना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी में गहराता पानी का संकट
जमीनी हालात जानने के लिए जब संवाददाता हिनौली गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन के अमल पर तीखे सवाल उठाए। गांव के निवासी संतोष कुमार पंकज ने बताया कि ग्राम सभा हिनौली में केंद्र सरकार के कोष से इस योजना के तहत पानी की टंकी बनवाई गई थी। उन्होंने कहा कि टंकी बने डेढ़ साल से भी अधिक समय बीत गया, पर अब तक उसमें पानी भरकर गांव में सप्लाई नहीं की गई।
संतोष कुमार पंकज का आरोप है कि गांव में पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन ज्यादातर घरों तक कनेक्शन तक नहीं पहुंचा। खुद का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनके अपने घर में भी आज तक कनेक्शन नहीं मिला। उनके मुताबिक टंकी बनने के बाद न तो उसमें पानी भरा गया और न ही किसी घर तक पानी पहुंचा, ऐसे में ग्रामीण इस झुलसाती गर्मी में पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।
पीने के लिए मोल लेना पड़ रहा पानी
निर्माण कार्य में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए संतोष कुमार पंकज ने कहा कि इस पूरी व्यवस्था के लिए संबंधित ठेकेदार, जूनियर इंजीनियर (जेई) और दूसरे जिम्मेदार अधिकारी कसूरवार हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी पैसे का सही इस्तेमाल नहीं हुआ और योजना का फायदा ग्रामीणों तक नहीं पहुंच सका। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और जिलाधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने बताया कि गांव में पानी की दिक्कत इस कदर गहरी है कि जिनके घरों में हैंडपंप हैं, वे जैसे-तैसे काम चला रहे हैं। जिनके पास साधन हैं, उन्होंने अपने स्तर पर समर्सिबल पंप लगवा लिए हैं। दूसरी ओर गरीब परिवार दूसरों के घरों से पानी मांगकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं और कई लोगों को तो पीने का पानी तक खरीदना पड़ रहा है।
जमीन में दबे पाइप, टोटी तक नदारद
गांव के एक अन्य निवासी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि टंकी बनने के बाद एक-दो बार तकनीकी जांच जरूर हुई, लेकिन उसके बाद कभी जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि टंकी चलाने के लिए जरूरी बिजली लाइन या सोलर सिस्टम की भी कोई पुख्ता व्यवस्था नजर नहीं आती। उनके अनुसार करीब 500 मीटर दूर सोलर प्लेट लगाने की बात कही गई थी, मगर वहां भी इंतजाम अधूरा रह गया।
मनोज कुमार सिंह ने बताया कि घरों तक पाइपलाइन तो पहुंचा दी गई, लेकिन न तो टोटी लगाई गई और न ही पानी की कोई व्यवस्था चालू हुई। जमीन के भीतर पाइप दबे पड़े हैं, मगर उनमें आज तक पानी की एक बूंद नहीं आई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बस यही इंतजार कर रहे हैं कि आखिर यह योजना कब शुरू होगी और कब उन्हें इसका लाभ नसीब होगा।
ग्राम प्रधान की भूमिका पर भी सवाल
ग्रामीण कन्हैया लाल ने बताया कि उनके मोहल्ले तक भी पानी नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि करीब दो साल का समय निकल गया, फिर भी हालात जस के तस हैं और गर्मी के मौसम में यह दिक्कत और भी विकराल हो जाती है। उन्होंने बताया कि कई परिवार बाजार से पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं।
कन्हैया लाल ने ग्राम प्रधान की भूमिका पर भी उंगली उठाई और कहा कि प्रधान ने अब तक इस परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया। ग्रामीणों के मुताबिक आज तक किसी ने यह जानने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर टंकी चालू क्यों नहीं हो रही और गांव को पानी कब मिलेगा।
लाखों की टंकी बन गई सफेद हाथी
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने हर घर तक जल पहुंचाने के इरादे से यह योजना शुरू की थी, मगर हिनौली गांव में यह सिर्फ कागजों तक सिमटी नजर आती है। गांव में खड़ी विशाल पानी की टंकी लोगों को रोज दिखती है, लेकिन उससे एक बूंद पानी आज तक किसी को नसीब नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लाखों रुपये फूंककर बनाई गई यह टंकी अब सफेद हाथी साबित हो रही है। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस परियोजना को चालू नहीं किया गया, तो सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मकसद अधूरा रह जाएगा और लोगों का भरोसा भी डगमगाएगा।
प्रशासन के संज्ञान का इंतजार
मौके पर की गई पड़ताल में साफ नजर आया कि गांव में पानी की समस्या असली और गंभीर है। कहीं पाइपलाइन होने के बावजूद पानी नहीं आ रहा, तो कहीं कनेक्शन ही नहीं दिए गए। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तुरंत मामले की जांच कराए, परियोजना की खामियों को दूर करे और दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। अब देखना यह है कि प्रशासन इन शिकायतों पर कब संज्ञान लेता है और जल जीवन मिशन के तहत बनी यह टंकी आखिर कब गांववालों की प्यास बुझाने का काम शुरू कर पाती है।
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