चरोटा भाजी और दाल की देसी सब्जी: स्वाद के साथ सेहत का खजाना, जानें आसान रेसिपी जीवनशैली 4 दिन पहले 7
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक चरोटा भाजी और अरहर दाल से बनी यह मिक्स सब्जी बरसात के मौसम की खास पहचान है। आयरन, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर यह देसी व्यंजन स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन मेल है।

छत्तीसगढ़ की खानपान परंपरा अपनी विविधता और देसी स्वाद के लिए जानी जाती है। यहां की रसोई में कई ऐसे पारंपरिक व्यंजन हैं जो जुबान को स्वाद देने के साथ-साथ शरीर को पोषण भी देते हैं। इन्हीं में से एक है चरोटा भाजी और दाल की मिक्स सब्जी, जो ग्रामीण इलाकों में दशकों से लोगों की पसंद बनी हुई है। खासकर बरसात के मौसम में यह व्यंजन बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है।

प्राकृतिक रूप से उगने वाली चरोटा भाजी और प्रोटीन से भरपूर दाल का यह संगम भोजन का जायका बढ़ाने के साथ शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी देता है। यही कारण है कि आज भी छत्तीसगढ़ के गांवों और घरों की रसोई में इस व्यंजन की अपनी अलग पहचान कायम है।

क्या है चरोटा भाजी

चरोटा भाजी छत्तीसगढ़ के खेतों और आसपास के प्राकृतिक इलाकों में आसानी से मिलने वाली एक पत्तेदार हरी सब्जी है। इसका स्वाद हल्का कसैला होता है, इसके बावजूद इसे बेहद स्वादिष्ट माना जाता है। स्थानीय लोग इसे लहसुन, मिर्च और हल्के मसालों के साथ पकाना पसंद करते हैं, ताकि इसकी प्राकृतिक खुशबू और पौष्टिकता बनी रहे।

आसान है इसकी रेसिपी

चरोटा भाजी और दाल की मिक्स सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले भाजी को अच्छी तरह साफ करके बारीक काट लिया जाता है। इसके बाद अरहर दाल को कुछ देर भिगोकर हल्दी और नमक के साथ कुकर में पकाया जाता है।

अब एक कड़ाही में तेल गर्म करके उसमें जीरा या राई, लहसुन, हरी मिर्च और सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाया जाता है। फिर प्याज और टमाटर को भूनकर उसमें कटी हुई चरोटा भाजी डाली जाती है। कुछ देर पकाने के बाद इसमें तैयार दाल मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता है। अंत में ऊपर से हरा धनिया डालकर इसे चावल या रोटी के साथ परोसा जाता है।

पोषण से भरपूर परंपरागत भोजन

विशेषज्ञों के मुताबिक, चरोटा भाजी में आयरन, फाइबर और कई जरूरी खनिज तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। वहीं, दाल को प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। दोनों का यह मेल एक संतुलित और पौष्टिक आहार तैयार करता है।

बच्चों से बुजुर्गों तक सभी की पसंद

ग्रामीण इलाकों में यह व्यंजन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोगों को भाता है। कम मसालों में तैयार होने के कारण यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद माना जाता है। यही वजह है कि इसे पारंपरिक भोजन का अहम हिस्सा गिना जाता है।

खानपान की विरासत को सहेजने की पहल

बदलती जीवनशैली और फास्टफूड के बढ़ते चलन के बीच पारंपरिक व्यंजनों की अहमियत और भी बढ़ गई है। चरोटा भाजी और दाल की सब्जी जैसी रेसिपी न सिर्फ स्वाद का आनंद देती हैं, बल्कि लोगों को अपनी संस्कृति, परंपरा और मिट्टी से भी जोड़ती हैं। ऐसे में स्थानीय व्यंजनों को अपनाकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध खाद्य विरासत को आगे बढ़ाया जा सकता है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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