जीवनशैली
2 महीने पहले
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विचारों
देसी स्वाद की पहचान
राजस्थान के जालोर की रसोई में सदियों से चली आ रही कुल्थी दाल ढोकली एक बेहद खास व्यंजन है। स्थानीय स्तर पर कुल्थी को 'करत' के नाम से भी जाना जाता है। मूंग या तुअर दाल की ढोकली के मुकाबले इसका अपना अलग ही देसी स्वाद होता है। बारिश के मौसम में जब हल्की और गरमा-गरम खुराक की तलाश रहती है, तब यह डिश सबसे उत्तम विकल्प बन जाती है।
घर की सादगी भरा स्वाद
जालोर की रहने वाली संतोष देवी बताती हैं कि इस व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है। इसे तैयार करने के लिए रसोई में मौजूद आम मसालों का इस्तेमाल होता है। यह खाने में हल्की होती है और पेट को भी राहत देती है। बच्चे हों या बुजुर्ग, हर आयु वर्ग के लोग इसे चाव से खाते हैं।
बनाने की आसान विधि
कुल्थी दाल ढोकली को तैयार करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
- सबसे पहले लहसुन और हरी मिर्च का दरदरा पेस्ट तैयार करें।
- ढोकली बनाने के लिए गेहूं के आटे में धनिया पाउडर, हल्दी, नमक, जीरा, हरा धनिया, मिर्च और तैयार किया हुआ लहसुन-मिर्च का पेस्ट मिलाएं। थोड़े-थोड़े पानी की मदद से एक नरम आटा गूंथ लें।
- आटे से छोटी-छोटी लोइयां या ढोकलियां तैयार करें।
- कुकर में पानी गर्म करें और उबाल आने से पहले ही तैयार ढोकलियां उसमें डालें।
- अब इसमें धुली हुई कुल्थी दाल, नमक और चुटकी भर सोडा डालकर पकने दें।
- मिश्रण में हल्दी और लाल मिर्च पाउडर मिलाएं। इसे करीब 40 से 45 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं ताकि दाल और ढोकली अच्छी तरह मिल जाएं।
जब यह गाढ़ा और स्वादिष्ट मिश्रण तैयार हो जाए, तो इसे ऊपर से शुद्ध घी डालकर परोसें। यह पारंपरिक भोजन आज के दौर में बाहर के भारी व्यंजनों से बचने के लिए एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प के रूप में उभरा है।
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