अमेरिका पर मंडरा रहा नेपाल जैसी तबाही का साया, 33 लाख लोगों के लिए खतरा बना 'सोता ज्वालामुखी' विश्व 2 घंटे पहले 3
नेपाल में हालिया प्राकृतिक आपदा के बाद अमेरिका के वॉशिंगटन स्थित माउंट रेनियर ज्वालामुखी को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिससे लाखों लोगों के जीवन पर संकट के बादल छाए हैं।

नेपाल की त्रासदी और अमेरिका की चिंता

नेपाल में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद घटना ने अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य में स्थित माउंट रेनियर ज्वालामुखी को लेकर वैज्ञानिकों की पुरानी चेतावनियों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। नेपाल में हुई जान-माल की भारी क्षति ने यह साबित कर दिया है कि प्रकृति कब अपना रौद्र रूप दिखा दे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। अब विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भी ठीक इसी तरह के खतरे की दहलीज पर खड़ा है।

क्यों खतरनाक है माउंट रेनियर?

माउंट रेनियर केवल एक सक्रिय ज्वालामुखी नहीं है, बल्कि यह अपने आप में एक बड़ा प्राकृतिक जोखिम भी है। इसकी विशाल और बर्फ से ढकी ढलानें इसे बेहद संवेदनशील बनाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस ज्वालामुखी के फटने की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह बिना फूटे भी विनाशकारी साबित हो सकता है। यदि ज्वालामुखी क्षेत्र में भूस्खलन होता है, ग्लेशियर अचानक पिघलते हैं, भारी बारिश होती है या फिर कोई छोटा भूकंप आता है, तो यह 'लहार' पैदा कर सकता है। लहार का अर्थ है पानी, कीचड़, बड़ी-बड़ी चट्टानों और मलबे का एक ऐसा तेज बहाव, जो अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को पल भर में नेस्तनाबूद कर सकता है।

33 लाख लोगों की जान पर खतरा

माउंट रेनियर को लेकर चिंता का सबसे बड़ा कारण इसके आसपास बसी घनी आबादी है। आंकड़ों पर गौर करें तो सिएटल-टकोमा मेट्रो क्षेत्र में 33 लाख से अधिक लोग निवास करते हैं, जो सीधे तौर पर इस संभावित खतरे के दायरे में हैं। इसके अलावा, करीब 60 हजार से ज्यादा लोग उस विशेष इलाके में रह रहे हैं, जिसे वैज्ञानिकों ने लहार की चपेट में आने वाला सबसे संवेदनशील हिस्सा माना है।

नेपाल की घटना से क्या सीख मिली?

नेपाल में बुधवार को हुई प्राकृतिक आपदा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई और अभी भी सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह तबाही हिमस्खलन या ग्लेशियर के एक विशाल हिस्से के अचानक टूटने से शुरू हुई थी। बर्फ का वह बड़ा टुकड़ा हजारों फीट नीचे गिरा और रास्ते में मौजूद पानी व चट्टानों के साथ मिलकर एक घातक मलबे के बहाव में बदल गया। यही स्थिति वैज्ञानिकों के लिए माउंट रेनियर के मामले में भी चिंता का विषय बनी हुई है। माउंट रेनियर की भौगोलिक स्थिति भी वैसी ही है, जिससे अचानक आने वाली प्राकृतिक घटनाएं कभी भी एक बड़े मानवीय संकट का रूप ले सकती हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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