जेपीएससी-जेएसएससी की 22 परीक्षाएं रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट का रोक से इनकार, राज्य सरकार से मांगा दो हफ्ते में जवाब झारखंड 2 घंटे पहले 6
झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी और जेएसएससी की 22 परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया है, लेकिन मामले में सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायिक गलियारों में पहुंच गया है। झारखंड HC ने JPSC और JSSC द्वारा आयोजित 22 विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने इस संवेदनशील मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 24 सितंबर को होनी तय हुई है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

यह याचिका प्रार्थी सत्यांशु शुभम, संजना सिंह और अन्य प्रभावित अभ्यर्थियों द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई है। इसमें मुख्य रूप से APP यानी सहायक लोक अभियोजक सहित अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के निर्णय को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जिन अभ्यर्थियों ने कड़ी मेहनत से चयन प्रक्रिया को पार कर लिया था, उन्हें इस फैसले से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

छात्र आंदोलन से बदला था पूरा घटनाक्रम

झारखंड में परीक्षाओं को रद्द करने का यह विवाद अचानक शुरू नहीं हुआ था। इसके पीछे राज्य का एक बहुत बड़ा छात्र आंदोलन था। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा था।

राजधानी रांची के मोराबादी मैदान और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के पास राज्य के कोने-कोने से आए हजारों छात्रों ने डेरा डाल दिया था। इन दोनों आयोगों की कार्यप्रणाली के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन करीब 26 दिनों तक लगातार चला, जिसे राज्य के इतिहास के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक माना जा रहा है।

प्रदर्शन के दौरान बढ़ा था तनाव

छात्रों के इस लंबे चले शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान कई बार तनावपूर्ण स्थितियां भी पैदा हुईं:

  • पुलिस के साथ तीखी झड़पें: कई मौकों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी बहस और झड़पें देखने को मिलीं।
  • लाठीचार्ज की घटनाएं: प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कुछ स्थानों पर लाठीचार्ज का सहारा भी लेना पड़ा, जिससे आक्रोश और बढ़ गया।
  • राजनीतिक समर्थन: इस छात्र आंदोलन को राज्य के प्रमुख विपक्षी दलों और स्थानीय संगठनों का खुला समर्थन मिला, जिससे यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक गलियारों में छा गया।
  • महाजुलूस का आयोजन: आंदोलनकारी युवाओं ने सरकार के खिलाफ बड़े महाजुलूस निकाले और पूरी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की एकसुर में मांग की।

भारी दबाव के बाद सरकार ने उठाया था कदम

छात्रों के इस उग्र आंदोलन और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण राज्य सरकार को कड़े कदम उठाने पड़े। सरकार ने इन धांधलियों की जांच के लिए SIT और CID का गठन किया था। जांच एजेंसियों से मिले शुरुआती इनपुट और रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की घोषणा की:

  • 22 विवादित परीक्षाएं रद्द: जांच के दायरे में आई कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया गया।
  • स्थगन की कार्रवाई: कुछ अन्य परीक्षाओं को फिलहाल के लिए टाल दिया गया।
  • निगरानी में परीक्षाएं: कई अन्य परीक्षाओं को अभी भी गहन जांच के दायरे में रखा गया है।

सरकार के इस फैसले से जहां आंदोलन कर रहे छात्रों को न्याय की उम्मीद जगी, वहीं उन अभ्यर्थियों के सामने संकट खड़ा हो गया जो चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके थे या पहले से अपनी सेवाएं दे रहे थे। इन प्रभावित अभ्यर्थियों ने ही सरकार के इस एकतरफा फैसले को मनमाना बताते हुए HC का दरवाजा खटखटाया है। अब सभी की निगाहें 24 सितंबर को होने वाली कोर्ट की अगली सुनवाई पर हैं, जहां सरकार को अपना पक्ष मजबूती से रखना होगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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