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2 घंटे पहले
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विदेश में करियर और भारत वापसी की हकीकत
आज के दौर में भारत के लाखों युवा बेहतर करियर, मोटी सैलरी और एक शानदार जीवनशैली की तलाश में विदेशों का रुख करते हैं। हर साल बड़ी संख्या में छात्र और पेशेवर अमेरिका जैसे देशों में जाकर बस रहे हैं। लेकिन इन सबके मन में एक सवाल अक्सर कौंधता है कि आखिर विदेश में अपनी मेहनत से बनाई गई दुनिया को छोड़कर वतन वापसी का सही वक्त क्या हो सकता है। हाल ही में अमेरिका में रह रहे बिहार के निवासी अरहम इश्तियाक ने अपने सोशल मीडिया वीडियो के माध्यम से इस विषय पर एक नया नजरिया पेश किया है जो इंटरनेट पर काफी चर्चा बटोर रहा है।
दो पीढ़ियों का अलग अनुभव
अरहम इश्तियाक के अनुसार, विदेशों में रह रहे भारतीयों यानी एनआरआई को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में देखा जाना चाहिए, क्योंकि उनकी वापसी का निर्णय उनकी उम्र और आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि 20 साल की उम्र में विदेश जाने वाले युवा और 40 की उम्र पार कर चुके अनुभवी पेशेवरों की प्राथमिकताएं और चुनौतियां पूरी तरह से अलग होती हैं। अरहम के मुताबिक, इन दोनों पड़ावों पर इंसान की कमाई की क्षमता और उसके फैसलों पर पड़ने वाला प्रभाव काफी मायने रखता है, जो उनके भविष्य की दिशा तय करता है।
40 की उम्र में वापसी के मायने
वीडियो में अरहम ने स्पष्ट किया कि जो लोग 40 साल की उम्र पार कर चुके हैं, वे अक्सर अपने करियर के चरम पर होते हैं और उन्होंने काफी संपत्ति और बचत जमा कर ली होती है। उनके पास निवेश और प्रॉपर्टी के रूप में एक मजबूत आर्थिक आधार होता है। ऐसे में यदि वे अमेरिका छोड़कर भारत आते हैं, तो उनकी जीवनशैली में आने वाला बदलाव उन्हें बहुत ज्यादा विचलित नहीं करता। उदाहरण के लिए, अगर कोई वहां 2 करोड़ रुपये कमा रहा था और भारत आकर उसकी आय घटकर 1 करोड़ रह भी जाती है, तो भी वह एक सुकून भरी और स्थिर जिंदगी जीने में सक्षम रहता है। उनकी आर्थिक मजबूती उन्हें वापसी का कठिन निर्णय लेने की आजादी देती है।
शुरुआती करियर का संघर्ष और अंतर
इसके विपरीत, 20 से 25 साल के युवाओं की स्थिति बिल्कुल अलग होती है। वे करियर के शुरुआती दौर में होते हैं और उनके लिए हर कदम महत्वपूर्ण होता है। होटल इंडस्ट्री में सक्रिय अरहम ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि अगर वे भारत में होते, तो शायद उनके लिए हर महीने 20 हजार रुपये कमाना भी एक बड़ी चुनौती होती। इसके उलट, आज अमेरिका में काम करते हुए वे प्रतिदिन 20 हजार रुपये से अधिक की कमाई कर पा रहे हैं। यही कारण है कि इस उम्र में भारत लौटना एक बड़ा जोखिम भरा फैसला बन जाता है, क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच वेतन और कामकाजी माहौल में भारी अंतर है।
कंफर्ट जोन से बाहर निकलने की सलाह
अरहम इश्तियाक ने अपने पोस्ट के कैप्शन के जरिए स्पष्ट किया है कि उनका मकसद किसी को देश छोड़ने के लिए उकसाना नहीं है। उनका मानना है कि युवाओं को अपने शुरुआती जीवन में घर और अपने कंफर्ट जोन से जरूर बाहर निकलना चाहिए। उनके अनुसार, दुनिया का अनुभव लेना, कड़ी मेहनत करना और नई चीजें सीखना बेहद जरूरी है। उनका संदेश है कि आप दुनिया घूमें, खूब धन कमाएं और जब आप आर्थिक रूप से पर्याप्त मजबूत हो जाएं, तब आप पूरी समझदारी के साथ यह तय कर सकते हैं कि आपको अपना शेष जीवन किस स्थान पर बिताना है।
सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर
अरहम के इस वीडियो ने इंटरनेट पर बहस को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई युवाओं ने अरहम की बातों से सहमति जताते हुए कहा कि विदेश में रह रहे लोगों के पास भले ही धन हो, लेकिन उन्हें परिवार के साथ बिताने वाले सुखद पलों की कमी खलती है, साथ ही उन्हें वहां लगातार कड़े कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर, कुछ लोगों का यह भी तर्क है कि हर व्यक्ति की परिस्थितियां अलग होती हैं और किसी को भी अपने करियर संबंधी फैसलों पर किसी को सफाई देने की आवश्यकता नहीं है। हर किसी का अपना सफर है और सफलता का पैमाना भी अलग होता है।
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