राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव का शंखनाद, 15 नवंबर तक पूरी होगी प्रक्रिया राजस्थान एक महीने पहले 68
राजस्थान में लंबे समय से अटके पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार ने हाईकोर्ट में चुनावी कार्यक्रम पेश कर दिया है, जिसके अनुसार 15 नवंबर तक सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी।

राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती के बाद चुनावों की घोषणा

राजस्थान में काफी समय से लंबित चल रहे पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर आखिरकार आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। सोमवार को राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से राजस्थान हाईकोर्ट के समक्ष चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम पेश किया। इस जानकारी के बाद अदालत ने चुनावी देरी से जुड़ी याचिका को निस्तारित कर दिया। हाईकोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग को सख्त निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा का कड़ाई से पालन किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब चुनाव प्रक्रिया के लिए किसी भी तरह का अतिरिक्त समय या मोहलत नहीं दी जाएगी और पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की होगी कि वे तय वक्त पर मतदान संपन्न कराएं।

15 नवंबर तक पूरी होगी चुनाव की समय सारिणी

जारी किए गए कार्यक्रम के अनुसार चुनाव तैयारियों का सिलसिला अगस्त के पहले सप्ताह से ही शुरू हो जाएगा। सबसे पहले अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण को लेकर बनी विशेष समिति 5 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके बाद 6 अगस्त से 15 अगस्त के बीच वार्डों के आरक्षण और लॉटरी निकालने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नगरीय निकाय चुनावों के लिए विस्तृत कार्यक्रम 17 अगस्त को घोषित किया जाएगा और इसके नामांकन की प्रक्रिया 22 अगस्त से शुरू होगी। निकाय चुनाव की पूरी कवायद 20 सितंबर तक समाप्त हो जाएगी। वहीं पंचायत चुनावों की बात करें, तो इनकी आधिकारिक अधिसूचना 23 सितंबर को जारी की जाएगी और 15 नवंबर तक पूरी चुनाव प्रक्रिया को हर हाल में संपन्न कर लिया जाएगा।

हाईकोर्ट की खंडपीठ का कड़ा रुख

इस पूरे मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ द्वारा की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार और चुनाव आयोग को कड़े शब्दों में याद दिलाया कि समय पर निष्पक्ष चुनाव कराना संवैधानिक जिम्मेदारी है। इससे पहले अदालत ने यह तक टिप्पणी की थी कि यदि आयोग चुनाव नहीं करवा पा रहा है, तो उसे स्पष्ट बताना चाहिए ताकि न्यायाधीश स्वयं चुनाव संपन्न करा सकें।

राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं

यह मामला कांग्रेस के विधायक रहे संयम लोढ़ा और अन्य की याचिका के बाद सुर्खियों में आया था। फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए संयम लोढ़ा ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो सरकार एक देश, एक चुनाव की वकालत करती है, उसे प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव भी साथ कराने चाहिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तव में चुनाव टालने की कोशिश कर रही थी और हाईकोर्ट की सख्ती के कारण ही उन्हें कार्यक्रम घोषित करना पड़ा।

अशोक गहलोत ने सरकार को घेरा

इससे पहले अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर चुनाव में जानबूझकर देरी करने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि आयोग को चुनाव कराने के लिए हाईकोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी। अशोक गहलोत ने राज्य निर्वाचन आयोग के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें आयोग ने कहा था कि पंचायती राज विभाग ने छह बार पत्र लिखने के बावजूद एससी, एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण संबंधी डेटा समय पर उपलब्ध नहीं कराया, जो सरकार की लापरवाही को दर्शाता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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