भारत
एक घंटा पहले
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विचारों
भारत-रूस संबंधों का नया अध्याय
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में शिरकत करने के लिए भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय बातचीत है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुलाकात को काफी गंभीरता से देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें क्रूड ऑयल, रक्षा सौदों, निवेश और व्यापारिक संबंधों को लेकर ठोस चर्चा होने की संभावना है। दोनों नेताओं के बीच पूर्व में बिश्केक में हुई मुलाकात के दौरान देखी गई आत्मीयता को देखते हुए इस बैठक से भी काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं।
तेल से इतर आर्थिक साझेदारी की दिशा
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत के लिए रूस से प्राप्त होने वाला कच्चा तेल ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से बेहद अहम है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूसी तेल को लेकर बढ़ते दबावों के बावजूद भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और जरूरतों के आधार पर ही तेल खरीद का निर्णय लेगा। इस बैठक में दोनों देशों का प्रयास रहेगा कि वे अपने आर्थिक संबंधों को केवल तेल खरीद तक सीमित न रखें। मोदी और पुतिन व्यापारिक विस्तार, द्विपक्षीय निवेश के अवसरों और स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के एजेंडे पर गंभीरता से चर्चा कर सकते हैं।
रक्षा क्षेत्र में बड़े सौदों की संभावना
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच रक्षा क्षेत्र के सहयोग को लेकर बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं। जानकारी के अनुसार, भारत और रूस के बीच 75 सुखोई-57 स्टील्थ फाइटर जेट की खरीद के समझौते को अंतिम रूप देने पर काम किया जा रहा है। पांचवीं पीढ़ी के इन अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के सौदे की कुल अनुमानित कीमत लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक होने की संभावना है। इसके अलावा, भारत की रक्षा क्षेत्र में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति के तहत दोनों देश मिलकर संयुक्त रक्षा उत्पादन पर भी कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं, जो तकनीक हस्तांतरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।
S-400 और परमाणु तकनीक पर मंथन
बैठक में S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की बाकी आपूर्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है। भारत ने रूस के साथ कुल 5 अरब 43 करोड़ डॉलर के सौदे के तहत 5 S-400 सिस्टम की खरीद का समझौता किया था, जिसमें से 4 यूनिट पहले ही भारत को प्राप्त हो चुकी हैं। अब पांचवीं यूनिट की समय पर डिलीवरी को लेकर बातचीत तय मानी जा रही है। साथ ही, परमाणु पनडुब्बी के क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाओं को तलाशा जाएगा। भारत रूसी तकनीक से लैस 112 मेगावाट क्षमता वाले शक्तिशाली रिएक्टर की तकनीक के अधिग्रहण को लेकर इच्छुक है, जिस पर दोनों देशों के बीच पहले से ही विचार-विमर्श जारी है।
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