चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा तय: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी के साथ होगी बड़ी बैठक राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 7
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं, जहाँ शनिवार को उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित है। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

दिल्ली में शी जिनपिंग की उपस्थिति पर लगा मुहर

भारत और चीन के कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से आने वाला शनिवार का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक द्विपक्षीय वार्ता का आयोजन किया गया है। यह पुष्टि हो चुकी है कि शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन में शिरकत करने के लिए दिल्ली पहुंचेंगे। इस यात्रा की आधिकारिक घोषणा आज भारतीय समय के अनुसार सुबह 10 बजे चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा की जाएगी।

लंबे अरसे बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का यह भारत दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण है। पिछली बार वह 2019 में भारत आए थे। इसके बाद गलवान घाटी की हिंसक घटनाओं के कारण दोनों देशों के आपसी रिश्तों में काफी तनाव उत्पन्न हो गया था। अब जबकि दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की कोशिशें तेज हुई हैं, ऐसे में यह मुलाकात बहुत अहम मानी जा रही है। पिछले कुछ समय से सीमा विवादों के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच संवाद और आपसी संपर्क का दायरा बढ़ा है, जिससे रिश्तों में सुधार की उम्मीदें जगी हैं। इस बैठक के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की दिशा पर दुनिया की नजरें टिकी होंगी।

ब्रिक्स का मंच और भारत की मेजबानी

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस महत्वपूर्ण ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शनिवार को दिल्ली पहुंचेंगे। ज्ञात हो कि भारत इस बार इस वैश्विक समूह की मेजबानी कर रहा है। ब्रिक्स दुनिया की उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक शक्तिशाली समूह है, जिसमें भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका मुख्य सदस्य हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस संगठन का विस्तार भी हुआ है। इस सम्मेलन के दौरान दोनों नेता भारत और चीन के आपसी संबंधों से जुड़े विभिन्न संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कर सकते हैं। इनमें सीमा पर शांति बनाए रखने, निवेश को बढ़ावा देने, व्यापारिक संबंधों और आपसी संपर्क को बेहतर बनाने जैसे विषय शामिल हैं। भारत ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता का होना अनिवार्य है, वहीं चीन भी अब संबंधों को सामान्य बनाने के लिए बातचीत का रास्ता अपना रहा है।

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का विस्तृत कार्यक्रम

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन की थीम 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' रखी गई है। इस दो दिवसीय महासम्मेलन में सदस्य देशों के प्रमुखों के अलावा विभिन्न साझेदार देशों के प्रतिनिधि और विशेष रूप से आमंत्रित नेता भी हिस्सा लेंगे। भारत की अध्यक्षता के दौरान अब तक देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जो भारत की वैश्विक सक्रियता को दर्शाते हैं।

शनिवार 12 सितंबर का शेड्यूल

शनिवार के दिन का कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहेगा। ब्रिक्स देशों के नेता भारत मंडपम पहुंचेंगे और दोपहर लगभग 2:35 बजे 'इंक्लूसिव ग्लोबल गवर्नेंस एंड स्ट्रेंथनिंग मल्टीलेटरलिज्म' (समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना) विषय पर एक बंद सत्र का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद शाम 4:25 बजे सभी नेता 'भारत इनोवेट्स एग्जीबिशन' का अवलोकन करेंगे। शाम 5:05 बजे नेताओं की आधिकारिक फैमिली फोटो ली जाएगी, जिसके तुरंत बाद 5:10 बजे संयुक्त वृक्षारोपण कार्यक्रम होगा। दिन का समापन प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित एक भव्य गाला डिनर के साथ होगा, जो शाम 7:30 बजे भारत मंडपम के लेवल-3 पर संपन्न होगा।

रविवार 13 सितंबर का एजेंडा

सम्मेलन के दूसरे दिन यानी रविवार 13 सितंबर को सुबह 9:55 बजे साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्षों और 'आउटरीच प्रोग्राम' के तहत आने वाले अन्य देशों के प्रमुखों का भारत मंडपम में आगमन होगा। सुबह 10:35 बजे फिर से फैमिली फोटो सत्र होगा। इसके बाद सुबह 10:50 बजे सम्मेलन का मुख्य ओपन सेशन शुरू होगा, जिसका विषय 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी: शेपिंग द फ्यूचर फॉर इंक्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ' है। इस सत्र में ब्रिक्स सदस्य और अन्य आमंत्रित नेता वैश्विक आर्थिक विकास, भविष्य की चुनौतियों और आपसी सहयोग की नई संभावनाओं पर अपने विचार साझा करेंगे।

भारत के लिए ब्रिक्स का महत्व

वर्ष 2026 का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस वर्ष यह समूह अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। भारत चौथी बार इस महत्वपूर्ण समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इस सम्मेलन से उम्मीद की जा रही है कि वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, तकनीक का आदान-प्रदान, वित्त, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास जैसे विषयों पर ठोस सहयोग पर सहमति बनेगी। भारत की कूटनीति का लक्ष्य इस मंच के माध्यम से अपनी वैश्विक भूमिका को और अधिक मजबूत करना है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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