21 किलोमीटर का सफर, अधिकतम रफ्तार 15 किमी प्रति घंटा, सिर्फ 4 कोच—फिर भी टिकट के लिए 10-12 घंटे की कतार व्यापार एक घंटा पहले 3
नेरल से माथेरान के बीच चलने वाली टॉय ट्रेन 21 किलोमीटर का रास्ता महज 8 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तय करती है। रोजाना सिर्फ लगभग 170 यात्री ही इसमें सफर कर पाते हैं, इसके बावजूद लोग टिकट के लिए 10 से 12 घंटे तक इंतजार करते हैं।

मुंबई से करीब 90 किलोमीटर दूर बसे माथेरान हिल स्टेशन तक ले जाने वाली टॉय ट्रेन का आकर्षण आज भी पर्यटकों के मन पर छाया हुआ है। यही कारण है कि इस अनोखी रेलयात्रा में सीट पाने के लिए कई यात्री टिकट काउंटर पर 10 से 12 घंटे पहले ही लाइन में लग जाते हैं। सीमित सीटों और निराले अनुभव की वजह से यह सेवा देश की सबसे लोकप्रिय हेरिटेज रेल सेवाओं में शुमार की जाती है।

पहाड़ों और घने जंगलों से होकर गुजरता है रास्ता

मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला के मुताबिक यह टॉय ट्रेन नेरल और माथेरान के बीच संचालित होती है। पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच से गुजरती हुई यह यात्रा पर्यटकों को एकदम अलग अनुभव देती है। ट्रेन रोजाना सुबह दो फेरे और शाम को वापसी में दो फेरे लगाती है, यानी कुल चार फेरे। सफर के दौरान यह तीन छोटे स्टेशनों पर रुकती है, जहां से यात्री आसपास के प्राकृतिक नजारों का आनंद उठा सकते हैं।

विस्टाडोम कोच और कूपे की भी सुविधा

यात्रियों के लिए इस ट्रेन में फर्स्ट क्लास, सेकेंड क्लास, कूपे और आधुनिक विस्टाडोम कोच की सुविधा मौजूद है। टिकट का किराया 95 रुपये से शुरू होकर 750 रुपये तक जाता है। सबसे ज्यादा किराया विस्टाडोम कोच का है, क्योंकि यह पूरी तरह वातानुकूलित है और इसके चारों ओर बड़े-बड़े शीशे लगे हैं। इन्हीं की मदद से यात्री सफर के दौरान पहाड़ों, घाटियों और हरियाली का शानदार दृश्य देख पाते हैं।

मानसून में बंद रहता है संचालन

इस ट्रेन का संचालन आमतौर पर अक्टूबर से जून तक होता है। मानसून के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए इसका परिचालन रोक दिया जाता है। एक खास बात यह भी है कि इसमें रोजाना केवल लगभग 170 यात्री ही सफर कर सकते हैं। सीमित सीटों के चलते टिकटों की मांग हमेशा बहुत ज्यादा बनी रहती है।

रवानगी से 45 मिनट पहले मिलते हैं टिकट

रेलवे स्टेशन पर टिकट ट्रेन के रवाना होने से करीब 45 मिनट पहले जारी किए जाते हैं। यही वजह है कि छुट्टियों और पर्यटन सीजन में लोग घंटों पहले पहुंचकर कतार में लग जाते हैं, ताकि अपनी सीट पक्की कर सकें। नेरल स्टेशन पर एक ट्रेन रात में पहुंचती है और माथेरान जाने वाले पर्यटक रातभर टिकट विंडो के सामने ही बैठ जाते हैं, ताकि सुबह सबसे पहले टिकट मिल जाए और वे टॉय ट्रेन से सफर कर सकें।

21 किलोमीटर का पूरा सफर

करीब 21 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर ट्रेन की अधिकतम गति 8 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है। यही कारण है कि यह दूरी तय करने में दो घंटे से अधिक समय लग जाता है। यह टॉय ट्रेन न सिर्फ देशी, बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी खूब लुभाती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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