मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
3
विचारों
भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर बुंदेलखंड के लिए विकास की नई इबारत लिखने जा रहा है। इस पूरी योजना में भोपाल से सागर तक की सड़क को फोरलेन में बदलने का काम सबसे अहम माना जा रहा है। यह मार्ग तैयार होने के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को आपस में जोड़ने में सागर की भूमिका और मजबूत हो जाएगी। सबसे बड़ी सहूलियत यह रहेगी कि सागर से भोपाल की दूरी करीब 25 किलोमीटर तक घट जाएगी।
3589 करोड़ का बड़ा निवेश
इस सड़क को फोरलेन में तब्दील करने के लिए सरकार 3589 करोड़ रुपये की राशि खर्च कर रही है। फिलहाल मार्ग के कई हिस्सों पर तेज गति से निर्माण कार्य चल रहा है। इनमें प्रमुख रूप से ये खंड शामिल हैं:
- भोपाल से विदिशा
- विदिशा से ग्यारसपुर
- सताई घाट से चौका
- चौका से कैमहा
- राहतगढ़ से बेरखेड़ी
सफर में बचेंगे 2 से 3 घंटे
मौजूदा समय में सागर से इंदौर पहुंचने में करीब 6 से 7 घंटे और कानपुर तक जाने में 8 घंटे तक का समय लग जाता है। टू-लेन सड़क होने के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी रहती है, जिससे यात्रा लंबी हो जाती है। लेकिन आने वाले 2 साल में जब यह फोरलेन सड़क बनकर तैयार होगी, तब इंदौर, कानपुर और मुंबई तक पहुंचने में 2 से 3 घंटे का समय बचने लगेगा। इससे आवाजाही पहले से कहीं तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।
उद्योग और निवेश को मिलेगी रफ्तार
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का सीधा लाभ बुंदेलखंड की अर्थव्यवस्था को मिलेगा। मजबूत सड़कों के चलते सागर समेत पूरे अंचल में बड़े उद्योगों के आने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। निवेश बढ़ने पर स्थानीय कारोबार को गति मिलेगी और रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।
निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति
इस परियोजना का काम अलग-अलग कंपनियों के जरिए विभिन्न फंड से कराया जा रहा है। कॉरिडोर के कुछ हिस्सों पर निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि कुछ जगहों पर काम अब भी जारी है। हालांकि कुछ खंडों को फोरलेन करने की मंजूरी फिलहाल केंद्र सरकार के पास लंबित है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही केंद्र से हरी झंडी मिल जाएगी, जिसके बाद ‘बुंदेलखंड विकास पथ’ का निर्माण और तेज रफ्तार पकड़ेगा।
Comments
0 comment