बैंगन की फसल पर तना-फल छेदक का हमला, जानें कीटों से बचाव के असरदार उपाय बिहार 2 घंटे पहले 2
बैंगन की खेती में तना-फल छेदक, माहू और सफेद मक्खी जैसे कीट सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाते हैं। नियमित निगरानी, खेत की सफाई, फेरोमोन ट्रैप और नीम तेल के छिड़काव से फसल को आसानी से बचाया जा सकता है।

बैंगन उगाने वाले किसानों के लिए फसल में लगने वाले कीड़े सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आते हैं। यदि समय पर इन पर काबू न पाया जाए तो पूरी फसल चौपट हो सकती है। खास तौर पर तना और फल छेदक कीड़ा, माहू तथा सफेद मक्खी बैंगन की खेती को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। इन कीटों के कारण पौधे कमजोर पड़ने लगते हैं और पैदावार भी घट जाती है। इसीलिए किसानों को शुरुआत से ही फसल पर नजर रखनी चाहिए और सही तरीके अपनाने चाहिए।

सबसे ज्यादा नुकसान करता है तना-फल छेदक

किसान धर्मेंद्र सिंह के अनुसार बैंगन की फसल को सबसे ज्यादा क्षति तना और फल छेदक कीड़ा पहुंचाता है। यह कीड़ा पहले पौधे के तने में छेद करता है और इसके बाद बैंगन के फल के भीतर घुसकर उसे अंदर ही अंदर खराब कर देता है।

ऐसे खराब बैंगन बाजार में कम कीमत पर बिकते हैं, जिससे किसानों को घाटा उठाना पड़ता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसान रोजाना अपने खेत का निरीक्षण करें। अगर किसी पौधे की कोई टहनी सूखी या खराब दिखे, तो उसे फौरन काटकर खेत से बाहर फेंक देना चाहिए।

संक्रमित फल और खेत की सफाई जरूरी

संक्रमित फलों को भी तुरंत हटा देना चाहिए, ताकि कीड़े बाकी पौधों तक न पहुंच सकें। खेत की साफ-सफाई को भी बेहद अहम माना जाता है। खेत में अधिक खरपतवार होने पर कीट तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहना चाहिए। साफ खेत में कीड़ों का प्रभाव कम रहता है और पौधे भी अच्छी तरह बढ़ते हैं।

फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल

कीट नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप एक कारगर उपाय माना जाता है। इसमें नर कीट आकर्षित होकर फंस जाते हैं, जिससे उनकी संख्या धीरे-धीरे घटने लगती है। कृषि विशेषज्ञ प्रति एकड़ 8 से 10 फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह देते हैं, जिससे फसल को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

नीम तेल का छिड़काव

इसके साथ ही नीम तेल का छिड़काव भी किसानों के लिए लाभकारी रहता है। किसान 5 मिली नीम तेल को एक लीटर पानी में मिलाकर फसल पर छिड़क सकते हैं। इससे कीटों का असर कम होता है और पौधे सुरक्षित रहते हैं। नीम आधारित उपाय फसल और मिट्टी दोनों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।

दवा का इस्तेमाल कब और कैसे करें

यदि कीटों का प्रकोप अधिक बढ़ जाए, तो किसानों को कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही दवा का प्रयोग करना चाहिए। दवा का छिड़काव सुबह या शाम के समय करना ज्यादा फायदेमंद रहता है, क्योंकि तेज धूप में छिड़काव करने से दवा का असर कम हो सकता है।

सही देखभाल से बढ़ेगी कमाई

कृषि विभाग का कहना है कि अगर किसान समय रहते निगरानी करें, खेत को साफ-सुथरा रखें और सही तकनीक अपनाएं, तो बैंगन की फसल को कीड़ों से आसानी से बचाया जा सकता है। उचित देखभाल से उत्पादन भी बढ़ेगा और किसानों को बेहतर आमदनी होगी।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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