ढाई करोड़ में एक कट्ठा: पटना समेत पूरे बिहार में जमीन की सर्किल दरें बढ़ीं, सरकार ने किया बड़ा संशोधन बिहार 2 महीने पहले 45
बिहार सरकार ने करीब एक दशक बाद जमीन के सर्किल रेट में बड़ा इजाफा किया है। ग्रामीण इलाकों में दरें 1.6 गुना और शहरी क्षेत्रों में लगभग दोगुनी होने से रजिस्ट्री व स्टांप शुल्क में भारी बढ़ोतरी होगी।

बिहार में जमीन खरीदना हुआ महंगा

बिहार में जमीन या मकान खरीदने की योजना बना रहे हैं तो अब अपना बजट बढ़ाना होगा। राज्य सरकार ने जमीन की सरकारी कीमत यानी सर्किल रेट (एमवीआर) में बड़ा बदलाव कर दिया है। निबंधन विभाग ने नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी हैं। चूंकि जमीन की रजिस्ट्री इसी दर के आधार पर होती है, इसलिए स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस भी अब ज्यादा चुकानी होगी।

कितने साल बाद हुआ बदलाव

ग्रामीण इलाकों में आखिरी बार वर्ष 2013 में और शहरी क्षेत्रों में वर्ष 2016 में सर्किल रेट में संशोधन हुआ था। इसके बाद जमीन की बाजार कीमतें लगातार चढ़ती रहीं, लेकिन सरकारी दरें वहीं ठहरी रहीं। इससे बाजार मूल्य और सरकारी मूल्य के बीच बड़ा फासला बन गया था। जिला स्तर की समितियों ने पिछले दस वर्षों में जमीन की कीमतें कई गुना बढ़ने का हवाला देते हुए दरें संशोधित करने की सिफारिश की थी। सरकार ने उसी आधार पर नई दरें तय की हैं।

नई दरें कितनी बढ़ीं

  • ग्रामीण क्षेत्रों में एमवीआर 1.6 गुना तक बढ़ाया गया है।
  • शहरी और शहर से सटे इलाकों में सर्किल रेट लगभग दोगुना कर दिया गया है।

पटना में कहां कितनी बढ़ी दर

राजधानी पटना में इसका असर सबसे ज्यादा दिखेगा। Dakbangla Chowk समेत 12 प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में मुख्य सड़क के किनारे जमीन की सर्किल दर बढ़कर 2.50 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा हो गई है।

  • मुख्य सड़क के नजदीक आवासीय जमीन: 1.43 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • सड़क किनारे आवासीय जमीन: 95.15 लाख रुपये से बढ़कर 1.31 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • Patliputra और Boring Road जैसे पॉश इलाके: 1.09 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.18 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • Jakkhanpur, Mithapur समेत कई इलाकों में मुख्य सड़क किनारे व्यावसायिक जमीन: 93.75 लाख रुपये से बढ़कर 1.87 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर

सर्किल रेट बढ़ने का सबसे सीधा असर जमीन और फ्लैट खरीदने वालों पर पड़ेगा। नई दरें लागू होने के बाद स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क, दोनों बढ़ जाएंगे। खासकर शहरों में घर खरीदने वालों की जेब पर यह बोझ कहीं ज्यादा भारी होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर रियल एस्टेट बाजार पर भी पड़ सकता है।

सरकार को मिलेगा अधिक राजस्व

इस फैसले से सरकार को रजिस्ट्री और स्टांप शुल्क के जरिए पहले से ज्यादा राजस्व मिलेगा। हालांकि आम लोगों के लिए जमीन और मकान खरीदना अब पहले की तुलना में कहीं महंगा हो जाएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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