बैल कोल्हू का सरसों तेल: साधारण तेल से क्यों है बेहतर और क्यों चुकानी पड़ती है इतनी ज्यादा कीमत? बिहार एक घंटा पहले 2
Bihar के Jahanabad में आज भी बैल कोल्हू से सरसों का तेल निकाला जाता है, जो बाजार में ₹400 और online platforms पर ₹500 प्रति किलो तक बिकता है। मशीन से निकले तेल के मुकाबले इसके पोषक गुण बरकरार रहते हैं, इसीलिए आयुर्वेद के जानकार भी इसे पहली पसंद मानते हैं।

सरसों तेल: हर घर की जरूरत

सरसों का तेल भारतीय रसोई की जान है। खाना पकाने से लेकर बच्चों की मालिश तक, इसका इस्तेमाल घर के कोने-कोने में होता है। डॉक्टर हों या आयुर्वेद के जानकार, सभी इसे फायदेमंद मानते हैं। लेकिन आज बाजार में जो तेल मिलता है, वह ज्यादातर मशीन से निकाला हुआ होता है। बढ़ती आबादी की मांग पूरी करने के लिए यह जरूरी भी हो गया है। फिर भी पुरानी परंपरा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

Bihar में अब भी जिंदा है कोल्हू की परंपरा

Bihar में यह पुरानी परंपरा अभी भी जीवित है। Jahanabad जिला मुख्यालय के पास Mallahchak Mod पर आज भी बैल कोल्हू से सरसों का तेल पेरा जाता है। गर्मियों में उत्पादन थोड़ा कम रहता है, लेकिन सर्दियों में दिन भर यह काम चलता रहता है।

Ram Ratan Sav का परिवार: सदियों पुरानी विरासत

यह काम Ram Ratan Sav का परिवार सदियों से करता आ रहा है और उन्हीं के घर पर कोल्हू लगा हुआ है। Ram Ratan Sav बताते हैं कि एक वक्त था जब इसी जगह पर आधा दर्जन बैल एक साथ काम करते थे और दिन भर में क्विंटल तक तेल निकल जाता था। अब सिर्फ एक बैल बचा है, जिससे सरसों के साथ-साथ दूसरे तेल भी निकाले जाते हैं।

मशीन vs बैल कोल्हू: गुणों का असली फर्क

Ram Ratan Sav का कहना है कि मशीन से तेल निकालने पर वह बहुत गर्म हो जाता है, जिससे सरसों के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। बैल कोल्हू में तेल गर्म नहीं होता, इसलिए उसके सारे गुण बने रहते हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद के ज्यादातर डॉक्टर बैल कोल्हू का सरसों तेल इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।

कीमत और उत्पादन: पूरी तस्वीर

  • गर्मियों में प्रतिदिन 4 किलो तेल निकलता है।
  • सर्दियों में यह मात्रा बढ़कर 8 किलो हो जाती है।
  • बाजार में यह तेल ₹400 प्रति किलो तक बिकता है।
  • Online platforms पर इसकी कीमत ₹500 प्रति किलो तक पहुंच जाती है।
  • आम मशीन से निकला सरसों तेल ₹200 प्रति किलो के आसपास मिलता है।

Ram Ratan Sav बताते हैं कि जो तेल वे दिन भर में निकालते हैं, वह घंटों के भीतर बिक जाता है। बाजार में इसकी उपलब्धता वैसे भी कम है, इसलिए मांग हमेशा बनी रहती है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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