बिहार
2 दिन पहले
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विचारों
बदलाव की बयार: आरा निबंधन कार्यालय बना जिले की शान
बिहार के भोजपुर जिले में स्थित आरा का निबंधन कार्यालय इन दिनों अपनी बेहतरीन कार्यप्रणाली और उन्नत सुविधाओं के कारण पूरे जिले में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आम नागरिकों से लेकर सरकारी कर्मचारियों तक, हर तबका इस दफ्तर की कार्यशैली की मुक्तकंठ से प्रशंसा करता है। इस सकारात्मक कायापलट के पीछे सब-रजिस्ट्रार तारकेश्वर पांडेय और उनकी पूरी टीम की पिछले तीन साल की अनवरत लगन और परिश्रम है।
पुरानी बदहाली और नई शुरुआत
कभी यह वही दफ्तर था जहाँ लोग अपने जरूरी कागजात पाने के लिए हफ्तों तक चक्कर काटते रहते थे और हर बार खाली हाथ लौटते थे। कर्मचारी फाइलें न मिलने का बहाना बनाकर लोगों को टालते रहते थे। लेकिन जब से तारकेश्वर पांडेय ने यहाँ का कार्यभार संभाला, इस पूरी व्यवस्था को जड़ से बदल दिया गया।
शाहाबाद की विरासत और चुनौती का स्वरूप
यह काम इतना आसान कतई नहीं था। दरअसल, आरा का यह रिकॉर्ड रूम कभी पुराने शाहाबाद जिले का मुख्यालय रहा था। इसी वजह से यहाँ भोजपुर के अभिलेखों के साथ-साथ कैमूर, रोहतास और बक्सर जिलों के भी दशकों पुराने रिकॉर्ड आपस में घुले-मिले पड़े थे। सब-रजिस्ट्रार पांडेय ने इस उलझी हुई स्थिति को एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया।
उन्होंने सबसे पहले रोहतास, कैमूर और बक्सर से जुड़े समस्त दस्तावेजों को कठिन परिश्रम से अलग करवाया और उन्हें उनके संबंधित जिलों को भेजवाया। इसके साथ ही एक उल्लेखनीय कदम यह उठाया गया कि वहाँ भेजे गए प्रत्येक रिकॉर्ड का विवरण आरा के निबंधन कार्यालय में भी सुरक्षित रखा गया।
दिन में रजिस्ट्री, शाम को इतिहास को सहेजने का काम
इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड रूम को सुव्यवस्थित रूप देने में टीम को करीब दो साल का लंबा समय लगा। सबसे उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि तारकेश्वर पांडेय दिन के कार्यालय समय में आम जनता की भूमि रजिस्ट्री का सारा कार्य निपटाते थे और शाम 5 बजे के बाद अपनी टीम के साथ मिलकर रात 8 बजे तक पुराने और जर्जर हो चुके दस्तावेजों को सहेजने और संरक्षित करने में जुट जाते थे।
सन 1860 से 2026 तक — हर रिकॉर्ड अब एक जगह
इस अनथक प्रयास का नतीजा आज सबके सामने है। सन 1860 से लेकर वर्ष 2026 तक के समस्त ऐतिहासिक और महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों को नए कवर लगाकर और व्यवस्थित तरीके से संजोकर रिकॉर्ड रूम में रख दिया गया है।
सब-रजिस्ट्रार तारकेश्वर पांडेय ने बताया कि जब उन्होंने यहाँ कार्यभार संभाला था, उस समय लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यही होती थी कि उन्हें उनके आवश्यक दस्तावेज नहीं मिल पा रहे। इसी शिकायत को उन्होंने एक मिशन की तरह लिया और आज उनकी व उनकी टीम की मेहनत रंग लाई है। अब भोजपुर जिले का कोई भी नागरिक यदि 1860 से लेकर आज तक का अपना कोई भी रिकॉर्ड लेने यहाँ आता है, तो उसे पहली ही कोशिश में बिना किसी अड़चन के उसका दस्तावेज मिल जाएगा।
डिजिटल और भौतिक — दोनों मोर्चों पर उपलब्धि
आरा निबंधन कार्यालय का यह डिजिटल एवं मैनुअल स्तर पर किया गया कायापलट वास्तव में अनुकरणीय है। यह कार्यालय अब भोजपुर जिले की सीमाओं से आगे बढ़कर पूरे बिहार के सरकारी दफ्तरों के लिए एक जीवंत प्रेरणास्रोत बन चुका है।
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