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2 घंटे पहले
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विचारों
पाकिस्तान में जगनाथ सिंह और वंती कौर की लक्षित हत्या ने जनरल आसिम मुनीर के असली चेहरे को उजागर कर दिया है। इस घटना ने उनके ऊपर खून के धब्बे छोड़ दिए हैं। मुनीर के संरक्षण में आतंकियों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि वे धार्मिक स्थलों को भी नहीं छोड़ रहे। भारत के खिलाफ लगातार गीदड़ भभकी देने वाले जनरल मुनीर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब हो चुके हैं।
आसिम मुनीर, आप चाहे जितना भी डबल-ट्रिपल प्रमोशन के पीछे छिपने की कोशिश करें, इतिहास आपको अल्पसंख्यकों का कातिल और एक 'फेल्ड मार्शल' के रूप में याद रखेगा। जगनाथ और वंती के खून के धब्बे अब आपके चेहरे पर हमेशा के लिए हैं। जब आप दुनिया के सामने पीड़ित होने का नाटक करेंगे, तब पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की चीखें सुनाई देंगी। आतंकियों की हिम्मत अब इतनी बढ़ गई है कि वे गुरुद्वारे में घुसकर खून की नदियां बहा रहे हैं।
गुरुद्वारे के भीतर कत्लेआम
पेशावर का वह इलाका, जहां सदियों से अल्पसंख्यक सिख परिवार शांति से रह रहे थे, अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। जगनाथ सिंह और वंती कौर अपने धार्मिक स्थल, गुरुद्वारे में मौजूद थे और उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि नफरत के सौदागर उनके करीब आ चुके हैं। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावर पूरी योजना के साथ गुरुद्वारे में दाखिल हुए। उनका मकसद चोरी या डकैती नहीं, बल्कि गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों में खौफ पैदा करना था।
हमलावरों ने करीब से जगनाथ और वंती पर गोलियां चलाईं। जब तक लोग कुछ समझ पाते या उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश होती, बहुत देर हो चुकी थी। जगनाथ और वंती ने गुरुद्वारे की चौखट पर ही दम तोड़ दिया। यह केवल दो इंसानों की हत्या नहीं थी, बल्कि पाकिस्तान में धार्मिक आजादी और अल्पसंख्यकों के जीने के अधिकार का कत्ल था।
आसिम मुनीर का शर्मनाक रवैया
इस खूनी वारदात के बाद जनरल आसिम मुनीर का रवैया सबसे शर्मनाक है। जब भी वे पोडियम पर आते हैं, पाकिस्तान की बदहाली, भूख या अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर एक शब्द नहीं बोलते। उनका ध्यान केवल भारत के खिलाफ गीदड़ भभकी देने पर होता है। सच यह है कि पाकिस्तान की सेना और आईएसआई ने हमेशा अपनी कमियों को छिपाने के लिए 'भारत फोबिया' का सहारा लिया है।
जब पेशावर में सिखों का खून बह रहा होता है, तब जनरल आसिम मुनीर भारत को गीदड़ भभकी देने वाले बयानों का ड्राफ्ट तैयार कर रहे होते हैं। लेकिन अब दुनिया उनकी खोखली धमकियों को जान चुकी है।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का नरसंहार
जगनाथ सिंह और वंती कौर की हत्या कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान, विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और सिंध प्रांत में गैर-मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचार बढ़ गए हैं। पेशावर में कई सिख दुकानदारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को दिन-दहाड़े गोली मारी गई है। यह दर्शाता है कि पाकिस्तान में सिखों, हिंदुओं और ईसाइयों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं रह गई है।
पुलिस और सेना इन हत्यारों को पकड़ने के बजाय उन्हें संरक्षण देती है, क्योंकि ये आतंकी संगठन पाकिस्तानी सेना के पाले हुए 'प्रॉक्सी टूल' हैं।
आसिम मुनीर की खोखली कोशिशें
आसिम मुनीर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री दुनिया भर में जाकर खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताते हैं। लेकिन जब अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट या संयुक्त राष्ट्र में अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों का मुद्दा उठता है, तो ये बगले झांकने लगते हैं। पेशावर के गुरुद्वारे में जगनाथ और वंती की हत्या ने पाकिस्तान के उस खोखले वादे की पोल खोल दी है जिसमें वह खुद को एक सुरक्षित मुल्क बताता है।
जब आपके अपने देश के नागरिक, जो सदियों से उसी मिट्टी का हिस्सा हैं, अपने पूजा स्थल पर सुरक्षित नहीं हैं, तो आपकी सेना और परमाणु ताकत की शेखी बघारना केवल एक मजाक बनकर रह जाता है। आसिम मुनीर, आप कितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन बेकसूरों के खून के धब्बे आपके कॉलर तक पहुंच चुके हैं। जब तक 'फेल्ड मार्शल' आसिम मुनीर और उनकी सेना को उनके पाले हुए आतंकियों की हरकतों की सजा नहीं मिलेगी, तब तक पाकिस्तान की धरती पर ऐसे ही बेकसूरों का खून बहता रहेगा।
जनरल मुनीर, आप अपनी गीदड़ भभकियों के पीछे चाहे जितना छिपने की कोशिश करें, इतिहास आपको अल्पसंख्यकों के कातिल और एक नाकाम जनरल के रूप में ही याद रखेगा। जगनाथ और वंती के खून का एक-एक कतरा आपकी सल्तनत की तबाही की गवाही दे रहा है।
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