बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
नए साल की वह रात, जो मातम में बदल गई
साल 2018 की आखिरी रात पूरी दुनिया नए साल के स्वागत में डूबी हुई थी। ठीक उसी वक्त दिल्ली के एक आलीशान फार्महाउस में रसूख, शराब और हथियार का ऐसा जानलेवा मेल बन रहा था, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। नए साल के जश्न के बीच चली गोलियों ने वहां मौजूद एक महिला आर्किटेक्ट की जिंदगी का अंत कर दिया।
किसकी पिस्तौल, कौन था आरोपी
यह फार्महाउस उस पार्टी का गवाह बना, जिसमें बिहार के मुजफ्फरपुर की साहिबगंज सीट से बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह भी शामिल थे। आरोप है कि उन्हीं की पिस्तौल से जश्न के दौरान अंधाधुंध फायरिंग हुई। इसी गोलीबारी की चपेट में महिला आर्किटेक्ट डॉ. अर्चना गुप्ता आ गईं और एक गोली उनके सिर में जा लगी, जिससे उनकी मौत हो गई।
'हर्ष फायरिंग' की कीमत
रसूख के नशे में की गई इस तथाकथित 'हर्ष फायरिंग' ने एक होनहार पेशेवर की जान ले ली। जो गोलियां जश्न के नाम पर चलाई गई थीं, उन्होंने एक परिवार को जीवन भर का गम दे दिया।
साढ़े सात साल बाद आया फैसला
इस सनसनीखेज मामले में न्याय मिलने में करीब साढ़े सात साल लग गए। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आखिरकार बिहार के इस बाहुबली विधायक राजू कुमार सिंह को दोषी करार दिया है। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर उस 'खूनी जश्न' की रात की पूरी कहानी को सुर्खियों में ला दिया है।
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