ट्विशा शर्मा मौत मामले में नया मोड़: कोर्ट में अहम सबूत की हैंडलिंग पर खड़े हुए सवाल, क्या बदलेगी जांच की दिशा? मध्य प्रदेश 41 मिनट पहले 2
भोपाल की ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब जांच का केंद्र सिर्फ मौत के कारण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कथित फांसी वाली रस्सी यानी लिगेचर की जब्ती और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठ गए हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि सबूत की पहचान और संरक्षण में कई अनियमितताएं हुईं।

भोपाल में हुई ट्विशा शर्मा की मौत की जांच एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। इस हाईप्रोफाइल मामले में अब उसी रस्सी को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं, जिससे कथित तौर पर फांसी लगाई गई बताई जा रही है। शिकायतकर्ता पक्ष ने हाई कोर्ट में दस्तावेजों के हवाले से दावा किया है कि इस अहम सबूत की पहचान, जब्ती और उसे सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में कई खामियां रहीं। अब जांच का फोकस केवल मौत के कारण पर नहीं, बल्कि इस महत्वपूर्ण साक्ष्य की हैंडलिंग पर भी आ गया है, जो पूरे घटनाक्रम की सच्चाई तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यदि शिकायतकर्ता पक्ष के आरोप सही साबित होते हैं, तो जांच की दिशा और मामले की कानूनी स्थिति, दोनों पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

क्या है पूरा मामला

नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल निवासी समर्थ सिंह से हुई थी। 12 मई की रात भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि ट्विशा को दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

रस्सी की जब्ती पर उठे सवाल

दस्तावेजों के मुताबिक, 13 मई को सुबह 9:42 बजे सब-इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने उस लिगेचर (रस्सी) को जब्त किया, जिसे घटना से जुड़ा मुख्य सबूत माना जा रहा है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि जब्ती पंचनामा में यह दर्ज ही नहीं है कि उस वस्तु की पहचान किसने की थी। उनका दावा है कि उस समय न तो ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह और न ही पति समर्थ सिंह ने इसे घटना में इस्तेमाल हुई रस्सी के रूप में चिन्हित किया था। इसके बावजूद पंचनामा में किसी अन्य पहचानकर्ता का नाम भी नहीं लिखा गया।

कस्टडी को लेकर भी आपत्ति

शिकायतकर्ता पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि जब्ती के बाद लिगेचर कुछ समय तक उसी जांच अधिकारी की कस्टडी में रहा और कथित तौर पर उनके वाहन में रखा गया, इसके बाद उसे एम्स भोपाल भेजा गया। सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या इस दौरान सबूत की शुचिता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए तय प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या आया

ट्विशा के पहले पोस्टमार्टम में डॉक्टरों ने मृत्यु का कारण ‘एंटेमॉर्टम हैंगिंग बाय लिगेचर’ बताया था। रिपोर्ट में गर्दन पर दोहरे लाल निशान दर्ज किए गए थे। इसके साथ ही शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर चोट, खरोंच और सूजन जैसे निशानों का भी उल्लेख किया गया था। फॉरेंसिक जांच के लिए नमूने सुरक्षित रख लिए गए थे।

केस डायरी के दस्तावेज तक पहुंच का आरोप

शिकायतकर्ता पक्ष ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनके अनुसार, लिगेचर से जुड़ा जब्ती पंचनामा केस डायरी का हिस्सा था और जांच के इस चरण में आरोपियों को उपलब्ध नहीं होना चाहिए था। लेकिन यह दस्तावेज 27 मई को गिरिबाला सिंह द्वारा अग्रिम जमानत याचिका में दाखिल जवाब के साथ संलग्न किया गया। इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि कहीं आरोपियों को जांच से जुड़ी सामग्री तक अनुचित पहुंच तो नहीं मिल गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अदालत ने अभी इस पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।

अन्य पंचनामों से तुलना में मिली विसंगति

शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि 13 मई को तैयार किए गए अन्य तीन जब्ती पंचनामों में समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के नाम तथा पहचान संबंधी विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज थे, जबकि लिगेचर से जुड़े पंचनामा में ऐसा कोई विवरण मौजूद नहीं है। इसे भी जांच में एक महत्वपूर्ण विसंगति के रूप में देखा जा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!