मोबाइल नहीं, सुबह जागते ही हथेली क्यों निहारते हैं ये लोग? महंत ने बताया किस्मत बदलने वाला राज धर्म 2 घंटे पहले 2
बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार सुबह उठते ही दोनों हाथ मसलकर हथेलियों का दर्शन करने की परंपरा दिन को शुभ बनाती है और मन में सकारात्मक ऊर्जा भरती है।

नींद खुलते ही मोबाइल या रील देखने के बजाय कुछ लोग सबसे पहले अपनी हथेलियों पर नजर डालते हैं। यह रिवाज वर्षों से चला आ रहा है और बड़े-बुजुर्ग आज भी बच्चों को सुबह उठकर हथेली देखने की सलाह देते हैं। मान्यता है कि इससे दिन की शुरुआत शुभ होती है और भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

क्या कहते हैं बल्लभगढ़ के महंत

बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सुबह जागते ही सबसे पहले अपने दोनों हाथों को आपस में मसलना चाहिए और इसके बाद हथेलियों का दर्शन करना चाहिए। उनके अनुसार वास्तु शास्त्र में इस परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है।

वे कहते हैं कि जब हम अपनी हथेलियों को देखते हैं तो उनमें मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और भगवान के स्वरूप का स्मरण करते हैं। इससे दिन की शुरुआत अच्छे विचारों के साथ होती है।

हथेली देखना भगवान के दर्शन समान

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के मुताबिक, सुबह हथेलियों का दर्शन करना भगवान गोविंद के दर्शन के समान माना जाता है। इससे मन में सकारात्मकता आती है और पूरे दिन व्यक्ति अच्छा महसूस करता है।

सुबह उठकर सबसे पहले क्या करें

सबसे पहले दोनों हाथों को आपस में मसलकर अपनी हथेलियों का दर्शन करना चाहिए। माना जाता है कि इससे दिन शुभ होता है और मन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं, इसलिए यह आदत और भी लाभकारी मानी जाती है।

बच्चों को भी सिखाएं यह संस्कार

महंत के अनुसार बच्चों को भी सुबह उठकर भगवान का स्मरण और हथेली दर्शन का संस्कार देना चाहिए, ताकि बचपन से ही उनमें अच्छी आदतें विकसित हों।

जो ब्रह्म मुहूर्त में न उठ पाएं

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि जो व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाता है, उसके लिए यह सबसे उत्तम समय माना गया है। हालांकि किसी कारणवश जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में नहीं उठ पाते, उन्हें भी सूर्य उदय से पहले उठने का प्रयास करना चाहिए। सूर्य निकलने के बाद अधिक देर तक सोना शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है।

वे यह भी बताते हैं कि सुबह उठते ही माता धरती को प्रणाम करना चाहिए। भगवान राम भी सुबह उठकर धरती माता को प्रणाम करते थे। हमारे शास्त्रों में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जो अच्छे संस्कार और अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

शांत मन और सकारात्मक सोच का राज

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य का कहना है कि यदि दिन की शुरुआत अच्छे विचारों, भगवान के स्मरण और हथेली दर्शन से की जाए तो मन शांत रहता है और दिनभर सकारात्मक सोच बनी रहती है। यही वजह है कि आज भी कई परिवारों में सुबह उठकर हथेली देखने की परंपरा निभाई जाती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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