उपनाम: धार्मिक मान्यता
बिहार का रहस्यमयी ब्रह्मकुंड: यहाँ भगवान ब्रह्मा ने बनवाए थे 22 कुंड, जानें क्यों हमेशा गर्म रहता है पानी
बिहार के राजगीर में स्थित ब्रह्मकुंड आस्था और विज्ञान का अद्भुत मेल है। यह देश का सबसे गर्म जलकुंड माना जाता है, जहाँ का पानी प्राकृतिक रूप से 45 डिग्री सेल्सियस पर गर्म रहता है।
सागर: 700 साल पुराने कल्पवृक्ष पर संकट, आंधी-पानी से झुका दुर्लभ पेड़, जानिए क्यों है यह खास
मध्य प्रदेश के सागर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित प्राचीन कल्पवृक्ष खराब मौसम के कारण झुक गया है, जिससे इसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय लोग और संगठन अब इस दुर्लभ ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं।
सावन 2026: कढ़ी खाने से परहेज क्यों किया जाता है, जानिए इसके पीछे की छिपी हुई धार्मिक और वैज्ञानिक सच्चाई
सावन के पवित्र महीने में खानपान से जुड़ी कई सावधानियां बरती जाती हैं, जिनमें कढ़ी का सेवन न करना भी शामिल है। ज्योतिषी और आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर कारण भी हैं।
मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए शुक्रवार को अर्पित करें ये 5 विशेष फूल, बरसेगा धन और वैभव
शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित होता है और इस दिन विशेष फूल अर्पित करने से आर्थिक तंगी दूर होकर सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आइए जानते हैं किन फूलों से प्रसन्न होती हैं माता लक्ष्मी और क्या है इनका धार्मिक महत्व।
शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को खीर का भोग क्यों चढ़ाते हैं? जानें पूजा के नियम और इसका धार्मिक महत्व
शुक्रवार का दिन धन की देवी माता लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन उन्हें खीर का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और शुक्र ग्रह के दोष दूर होते हैं।
निर्जला एकादशी 2026: जानिए इस दिन का महत्व और क्यों इसे माना जाता है सबसे खास
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इस दिन बिना जल और अन्न के व्रत रखने से पूरे साल की एकादशियों का पुण्य मिल जाता है।
निर्जला एकादशी पर बरसेगी लक्ष्मी-नारायण की कृपा, इस बार फरीदाबाद के लिए खास है यह व्रत
25 जून 2026 को मनाई जाने वाली निर्जला एकादशी इस बार गुरुवार को पड़ रही है, जो विशेष रूप से सुख-समृद्धि और विवाह बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत शुभ मानी जा रही है।
12 साल में सिर्फ एक बार खिलता है यह दुर्लभ फूल, जानिए क्या है इसकी रहस्यमयी कहानी
प्रकृति के अद्भुत चमत्कारों में शुमार ब्रह्म कमल का फूल 12 साल में महज एक बार खिलता है। अपनी औषधीय और आध्यात्मिक खूबियों के कारण यह फूल दुनिया भर में खास पहचान रखता है।
पितरों की तस्वीर लगाने से पहले जान लें ये नियम, गरुड़ पुराण में बताई गई है उचित दिशा और स्थान
गरुड़ पुराण और वास्तु मान्यताओं के अनुसार पूर्वजों की तस्वीर घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा की दीवार पर लगाना शुभ माना जाता है, जबकि मंदिर, रसोई और सीढ़ियों जैसी जगहों से बचने की सलाह दी जाती है।
वास्तु संकेत: राह में अचानक मिले रुपये-सिक्के, सौभाग्य का इशारा या किसी मुसीबत की आहट? जानें ज्योतिष की राय
ज्योतिष और परंपरागत मान्यताओं में रास्ते पर पड़ा सिक्का या नोट मिलना खास संकेत माना जाता है। जानिए इसका असल मतलब और इससे जुड़ी मान्यताएं।
सिद्धिविनायक श्रीगणेश दर्शन: आज इस मंत्र के जाप से हटेगी हर बाधा और पूरी होगी हर मनोकामना
हिंदू धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है और इस दिन मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन तथा गणेश मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
पंचमुखी बेलपत्र: सौभाग्य का दुर्लभ संकेत, जानें किन भाग्यवानों को होता है इसका दर्शन
तीन पत्तियों वाला बेलपत्र तो आम है, लेकिन पंचमुखी बेलपत्र मिलना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। मान्यता है कि यह बेलपत्र भगवान शिव की विशेष कृपा का प्रतीक होता है और सौभाग्यशाली लोगों को ही प्राप्त होता है।
रात की शादियों पर देवकीनंदन ठाकुर का सवाल, गोधूलि बेला को बताया विवाह के लिए सर्वश्रेष्ठ समय
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने रात में होने वाले विवाह की परंपरा पर सवाल उठाते हुए गोधूलि बेला को विवाह के लिए सबसे शुभ और उत्तम समय बताया है. उन्होंने शादियों में बढ़ती मद्यपान की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई.
नीलकंठ हो या गौरैया... घर में इन पक्षियों का आना क्यों कहलाता है सौभाग्य का संकेत? जानिए मान्यता
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में कुछ पक्षियों का घर पर आना शुभ ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक माना जाता है। जानिए ऐसे पक्षियों के बारे में जिनका आगमन भाग्य, धन और सुख-शांति से जोड़कर देखा जाता है।
छतरपुर की उर्मिल नदी का त्रेतायुग से नाता, बहन सीता से मिलने नदी रूप में आई थीं उर्मिला; जानें लोकमान्यता
छतरपुर जिले की उर्मिल नदी का असली नाम उर्मिला नदी था और लोकमान्यता के अनुसार यह नदी माता सीता की छोटी बहन उर्मिला का रूप मानी जाती है, जिसका संबंध त्रेतायुग से जोड़ा जाता है।