झारखंड
एक घंटा पहले
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विचारों
अब तक आपने गाय, भैंस और देसी घी की कई किस्मों के बारे में सुना होगा और उनका इस्तेमाल भी किया होगा, लेकिन क्या कभी दालचीनी से बने घी के बारे में जाना है? झारखंड के पलामू जिले में एक ऐसा ही अनोखा और पारंपरिक आयुर्वेदिक घी तैयार किया जा रहा है, जिसे 'दालचीनी का घी' के नाम से जाना जाता है।
कौन तैयार कर रहे हैं यह खास घी
आयुर्वेद के जानकार शिव कुमार पांडे पिछले कई वर्षों से इस विशेष घी को पूरी तरह पारंपरिक और प्राकृतिक तरीके से तैयार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह पुराने जमाने में इस्तेमाल की जाने वाली बेहद उपयोगी औषधियों में से एक है, जो आज के दौर में लगभग खत्म होती जा रही है।
शतसिद्ध पद्धति से दो महीने में तैयार
इस घी को बनाने में पारंपरिक शतसिद्ध पद्धति अपनाई जाती है और इसे तैयार होने में करीब दो महीने का समय लगता है। पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक विधि पर आधारित होती है, जिससे इसके औषधीय गुण बने रहते हैं।
किन परेशानियों में बताया जा रहा फायदेमंद
दावे के मुताबिक, यह दालचीनी का घी जोड़ों के दर्द और दमा जैसी समस्याओं में राहत देने वाला माना जाता है। यही वजह है कि इसे प्राचीन और दुर्लभ होती आयुर्वेदिक औषधियों की श्रेणी में रखा जा रहा है।
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