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एक घंटा पहले
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पाकिस्तान में लगातार बढ़ती आतंकी वारदातों और बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच अब सरकार और सेना दोनों कठघरे में हैं। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फ) के प्रमुख मौलाना फजल-उर-रहमान ने एक बार फिर देश की सैन्य व्यवस्था पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरे देश में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए गए, तो फिर आतंकवाद आज भी क्यों फल-फूल रहा है।
सैन्य अभियानों पर तीखे सवाल
बलूचिस्तान के पिशिन में एक जनसभा को संबोधित करते हुए फजल-उर-रहमान ने कहा कि स्वात से लेकर बलूचिस्तान तक सेना ने कई ऑपरेशन चलाए, मगर इसके बावजूद आतंकवाद का खात्मा नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षा देने की बुनियादी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम साबित हुई है।
थानों और चौकियों तक असुरक्षित
मौलाना का दावा था कि खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कोई भी पुलिस थाना, सैन्य चेकपोस्ट या फ्रंटियर कॉर्प्स का किला पूरी तरह महफूज नहीं है। उन्होंने इसे देश की मौजूदा सुरक्षा नीति की सबसे बड़ी विफलता बताया। उन्होंने याद दिलाया कि बीते महीनों में इन दोनों प्रांतों में सुरक्षा बलों पर लगातार हमले हुए हैं, जिनमें कई सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं।
हाइब्रिड व्यवस्था और विदेश नीति पर निशाना
फजल-उर-रहमान ने सिर्फ सेना ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान की पूरी हाइब्रिड व्यवस्था को आड़े हाथों लिया। उनके अनुसार देश की सुरक्षा और विदेश नीति, दोनों ही मोर्चों पर असफल रही हैं और पाकिस्तान क्षेत्रीय स्तर पर लगातार अलग-थलग पड़ता जा रहा है। भारत और अफगानिस्तान के साथ बंद सीमाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि पड़ोसी मुल्कों से व्यापार और संपर्क बढ़ाए बगैर आर्थिक तरक्की आखिर कैसे मुमकिन होगी।
चीन भी असंतुष्ट
मौलाना ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार चीन भी मौजूदा सुरक्षा हालात से नाखुश है। उन्होंने कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) से जुड़े चीनी नागरिकों और परियोजनाओं को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पा रही, जिसके चलते बीजिंग में भी नाराजगी है।
राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल
फजल-उर-रहमान ने देश की राजनीतिक व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक इंजीनियरिंग ने समाज में दरार और बढ़ा दी है। उनका कहना था कि सरकार और संस्थाओं को आलोचकों पर देशद्रोही होने का ठप्पा लगाना बंद करना चाहिए। उनके मुताबिक चुनावी प्रक्रिया और मौजूदा संसद की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।
अभियान जारी रखने का ऐलान
मौलाना ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा खतरों के बावजूद उनकी पार्टी पूरे देश में अपना राजनीतिक अभियान जारी रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें हिंसा के सहारे उनकी पार्टी को डराने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन JUI-F पीछे हटने वाली नहीं है।
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