सीबीएसई को मिला नया चेयरमैन और सचिव, जानिए दोनों अधिकारियों के बारे में शिक्षा 14 घंटे पहले 5
ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद के बीच सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया प्रमुख और वरुण भारद्वाज को बोर्ड का नया सचिव नियुक्त किया है।

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के नए चेयरमैन और सचिव के नामों पर मुहर लग गई है। ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सरकार ने मंगलवार को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को बोर्ड की कमान सौंपी है। इसके साथ ही 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा अधिकारी वरुण भारद्वाज को सीबीएसई का नया सचिव बनाया गया है।

राहुल सिंह और हिमांशु गुप्ता का हुआ था तबादला

इन नियुक्तियों से पहले सरकार ने सीबीएसई के तत्कालीन चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का स्थानांतरण कर दिया था। साथ ही बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के लिए सेवाओं की खरीद से जुड़े मामलों की पड़ताल करने के लिए एक समिति भी बनाई गई थी। मंगलवार को जारी कैबिनेट सचिवालय के ज्ञापन के मुताबिक, इस समिति की अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस राधा चौहान करेंगी।

चौहान को यह छूट दी गई है कि आवश्यकता पड़ने पर वह दूसरे विभागों के अधिकारियों से मदद ले सकती हैं, वहीं क्षमता निर्माण आयोग जांच पैनल को सचिवालयी सहयोग उपलब्ध कराएगा। पैनल को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को सौंपने का जिम्मा दिया गया है।

कौन हैं नए नियुक्त अधिकारी

सीताराम भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2001 बैच के अधिकारी हैं और इस समय गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर तैनात हैं। दूसरी ओर, वरुण भारद्वाज मौजूदा समय में शिक्षा मंत्रालय में निदेशक के तौर पर कार्यरत हैं और वह 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा अधिकारी हैं।

आखिर क्या है ओएसएम प्रणाली का विवाद

सीबीएसई उस वक्त सुर्खियों और विवादों में घिर गया, जब कक्षा 12 के कुछ विद्यार्थियों ने यह शिकायत की कि बोर्ड की ओर से अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन प्रतियां उनकी अपनी लिखावट से मेल नहीं खा रही थीं। इस वजह से ओएसएम प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान में गड़बड़ी की आशंका खड़ी हो गई।

इसके बाद बोर्ड परीक्षा की प्रक्रिया में ओएसएम प्रणाली को लागू किए जाने को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने चिंता जताई। चूंकि इससे लाखों बच्चों का भविष्य जुड़ा हुआ है, इसलिए यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया और सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया।

यही वजह रही कि बोर्ड को तकनीकी खामियों, भुगतान में विफलता तथा सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी जैसे मुद्दों पर आलोचना झेलनी पड़ी, जिसके चलते इस पूरी व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग जोर पकड़ने लगी।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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