‘मेरी बेटी को ढूंढ लाओ…’ – दयारा बुग्याल में लापता बबीता पांडेय के लिए तड़प रहे बेबस पिता और दादी उत्तराखंड 3 महीने पहले 57
दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई रामनगर की 24 वर्षीय बबीता पांडेय कई दिनों से लापता हैं। उत्तरकाशी के घने जंगलों में राहत एजेंसियां ड्रोन और खोजी कुत्तों के साथ दिन-रात तलाश में जुटी हैं, जबकि घर पर परिजन हर पल अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं।

उत्तराखंड के दयारा बुग्याल ट्रेक पर पहुंची रामनगर की रहने वाली 24 वर्षीय बबीता पांडेय पिछले कई दिनों से लापता हैं। उनके अचानक गायब हो जाने से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे इलाके में चिंता की लहर है। राहत और बचाव एजेंसियां लगातार उनकी तलाश में जुटी हुई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।

घने जंगलों में दिन-रात सर्च ऑपरेशन

उत्तरकाशी के दुर्गम रास्तों और घने जंगलों में बबीता की तलाश के लिए बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। इस सर्च ऑपरेशन में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और वन विभाग की टीमें शामिल हैं। मुश्किल भौगोलिक हालात के बावजूद ये टीमें ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से दिन और रात लगातार चप्पे-चप्पे की छानबीन कर रही हैं।

घर पर पसरा सन्नाटा और बेचैनी

उधर, रामनगर स्थित बबीता के घर पर गहरी मायूसी और बेचैनी का माहौल बना हुआ है। परिवार का हर सदस्य बस इसी आस में है कि कहीं से उनकी लाडली के सुरक्षित होने की खबर आ जाए।

बबीता के दिव्यांग पिता, उनकी बुजुर्ग दादी और छोटा भाई हर पल फोन की घंटी बजने का इंतजार कर रहे हैं। बूढ़ी दादी रो-रोकर अपनी पोती की सलामती की दुआ कर रही हैं और बबीता को सकुशल ढूंढ लाने की गुहार लगा रही हैं।

परिवार को सुरक्षित वापसी की उम्मीद

परिवार की एक ही प्रार्थना है कि उनकी बेटी जल्द से जल्द सुरक्षित घर लौट आए। राहत एजेंसियों का अभियान जारी है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तलाश में जुटी टीमों को कब अच्छी खबर मिलती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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