नोएडा के सेक्टर 122 में खुले नाले में गिरे पूर्व वैज्ञानिक, बोले- 'अब समझ आया युवराज मेहता की जान कैसे गई' उत्तर प्रदेश 3 महीने पहले 62
नोएडा के सेक्टर 122 में टहलने निकले पूर्व वैज्ञानिक डॉ. आर एस शर्मा बिना ढके गहरे नाले में जा गिरे और राहगीरों की मदद से जान बच पाई। उन्होंने नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

नोएडा में करीब 6 महीने पहले युवराज मेहता की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था, लेकिन उस घटना के बाद भी प्राधिकरण की लापरवाही पर कोई रोक नहीं लगी। अब सेक्टर 122 से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक पूर्व वैज्ञानिक गहरे और खुले नाले में जा गिरे। गनीमत रही कि वहां मौजूद लोगों ने उन्हें समय रहते बाहर निकाल लिया और उनकी जान बच गई।

टहलने निकले थे, अचानक नाले में समा गए

सेक्टर 122 में रहने वाले पूर्व वैज्ञानिक डॉ. आर एस शर्मा रविवार की शाम करीब साढ़े 8 बजे अपनी पत्नी और बेटी के साथ टहलने निकले थे। पॉश मानी जाने वाली इस मार्केट के बाहर स्ट्रीट लाइट बंद थीं और नाला खुला पड़ा था। इसी दौरान बैंक एटीएम के सामने वे अचानक गहरे नाले में गिर गए और पूरी तरह उसके अंदर समा गए।

उन्होंने बताया कि नाला इतना गहरा था कि वे पूरी तरह डूब गए, लेकिन तैरना आने की वजह से किसी तरह गंदे पानी से बाहर की ओर आ सके। गिरते हुए उनकी बेटी ने देख लिया और तुरंत वहां से गुजर रहे राहगीरों की मदद ली, जिसके बाद उन्हें नाले से बाहर निकाला गया।

परिवार और राहगीरों ने बचाई जान

डॉ. शर्मा ने बताया कि वे नाले में इतना नीचे चले गए थे कि उनके पैर जमीन तक नहीं पहुंच पा रहे थे। उन्होंने कहा, "मुझे तैरना आता था, इसलिए किसी तरह ऊपर आ गया। मेरी बेटी, पत्नी और ड्राइवर के चिल्लाने पर राहगीरों ने मदद की और तब जाकर मैं बाहर निकल सका।"

प्राधिकरण पर जीएफआर उल्लंघन का आरोप

पूर्व वैज्ञानिक ने सरकारी तंत्र और जिम्मेदार अधिकारियों पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि नोएडा प्राधिकरण जीएफआर का उल्लंघन कैसे कर सकता है, जबकि उन्होंने खुद इस क्षेत्र में काम किया है और नियमों की अच्छी जानकारी रखते हैं।

नोएडा प्राधिकरण ने कॉन्क्रीट का नाला बना दिया, तो उसे ढकना कैसे भूल गए। यह पूरी तरह जीएफआर का उल्लंघन है। अगर काम पूरा नहीं हुआ था तो उसे ऐसे कैसे छोड़ा गया और वहां कोई साइन बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया।

पॉश मार्केट में पसरा था अंधेरा

डॉ. शर्मा के अनुसार, उस वक्त केवल एटीएम के भीतर की लाइट जल रही थी, जबकि आसपास की सभी स्ट्रीट लाइट बंद थीं और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। उन्होंने कहा कि ठीक इसी तरह की लापरवाही ने 6 महीने पहले सेक्टर 150 में युवराज मेहता की जान ले ली थी।

उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "रिटायरमेंट के बाद हम दिल्ली छोड़कर नोएडा इसलिए आए थे कि यहां बेहतर और सुरक्षित जीवन मिलेगा। लेकिन प्राधिकरण की यह लापरवाही लोगों पर भारी पड़ रही है। जब मैं नाले के अंदर था, तभी मुझे सेक्टर 150 की घटना और युवराज मेहता याद आ गए कि आखिर उनकी जान कैसे गई होगी। अगर उस वक्त मेरा परिवार और राहगीर नहीं होते, तो मेरी जीवन लीला भी समाप्त हो सकती थी।"

अधूरे टेंडर पर उठाए सवाल

डॉ. शर्मा ने कहा कि वे खुद सरकारी आदमी रहे हैं और टेंडर प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई इस तरह का टेंडर अधूरा कैसे छोड़ सकता है और अगर काम अधूरा है तो उसे खोला ही क्यों जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि सुनने में आया है कि उनके गिरने के अगले ही दिन स्लैब लगाकर नाले को ढक दिया गया।

देश के लिए किए हैं कई बड़े काम

डॉ. आर एस शर्मा केवल एक पूर्व वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डिप्टी डायरेक्टर जनरल भी रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने देश के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, जिनमें कोविड-19 के दौरान देशभर में डायग्नोसिस लैब स्थापित करना और सरोगेसी बिल तैयार करना जैसे काम शामिल हैं।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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