धर्म
एक घंटा पहले
2
विचारों
निर्जला एकादशी का विशेष महत्व
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष में कुल 24 एकादशियां आती हैं, जो मानव जीवन के कल्याण के लिए समर्पित हैं। इनमें से ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली निर्जला एकादशी को सबसे अधिक प्रभावशाली माना गया है। इसे सभी एकादशियों में सबसे कठिन व्रत माना जाता है, लेकिन इसका फल भी दोगुना प्राप्त होता है। यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में आर्थिक तंगी, असाध्य रोगों या फिर कार्यों में बार-बार आ रही बाधाओं से परेशान है, तो इस एकादशी का व्रत उसके लिए अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होता है।
वर्ष 2026 में कब है निर्जला एकादशी
पंडित श्रीधर शास्त्री ने बताया कि साल 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूरे दिन निर्जला रहकर भगवान विष्णु का ध्यान करना और उनकी भक्ति में लीन रहना शुभ माना गया है।
शिव योग और स्वाति नक्षत्र का दुर्लभ संयोग
इस बार की निर्जला एकादशी पर एक खास संयोग बन रहा है। यह एकादशी शिव योग और स्वाति नक्षत्र में पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन योगों और नक्षत्रों में किए गए धार्मिक अनुष्ठान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। गुरुवार का दिन होने के कारण, यह व्रत करने से साधकों को ग्रह बाधाओं, पारिवारिक कलह और कार्यों में आ रही रुकावटों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
पूजा और उपासना की विधि
भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए इस दिन निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:
- भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें।
- विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना अत्यंत लाभकारी है।
- भगवान के स्तोत्रों और उनके बीज मंत्रों का जाप करें।
- शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करते हुए पूरे दिन निर्जला रहकर व्रत संपन्न करें।
मान्यता है कि इस एकादशी का विधि-पूर्वक पालन करने से व्यक्ति को साल की सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है और जीवन की तमाम परेशानियां अनुकूल होने लगती हैं।
Comments
0 comment