भरतपुर के गांवों में आज भी बरकरार है चूल्हे पर खाना पकाने की परंपरा राजस्थान 3 महीने पहले 128
आधुनिक युग में गैस चूल्हों के बढ़ते चलन के बावजूद भरतपुर के कई इलाकों में मिट्टी और गोबर से बने चूल्हों पर भोजन पकाने का रिवाज अब भी कायम है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

आज के दौर में जब हर घर में गैस चूल्हे और नए जमाने के उपकरण पहुंच चुके हैं, तब भी भरतपुर के कुछ गांवों ने अपनी पुरानी जीवनशैली को संभाल कर रखा है। इन इलाकों की रसोई में आज भी देसी संस्कृति की महक महसूस की जा सकती है।

मिट्टी के चूल्हों का खास महत्व

गांवों में आज भी मिट्टी और गोबर से बने खास चूल्हे, जिन्हें भेगड़ा कहा जाता है, पर खाना पकाना काफी लोकप्रिय है। लोग इन पर धीमी आंच का इस्तेमाल करके दूध गर्म करते हैं और दलिया तैयार करते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, धीमी आंच पर तैयार होने वाले इस भोजन का स्वाद किसी भी आधुनिक मशीन से बने खाने से कहीं ज्यादा बेहतर होता है।

सेहत के लिए फायदेमंद है देसी तरीका

स्थानीय लोगों का मानना है कि पारंपरिक तरीके से तैयार खाना न केवल अधिक पौष्टिक होता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी काफी गुणकारी है। यह परंपरा केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन और हमारी पुरानी विरासत को जीवित रखने का एक जरिया भी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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