टाटा डिजिटल में बड़ा बदलाव, बिगबास्केट के CEO पद से विदाई और अमेजन के दिग्गज की एंट्री व्यापार 2 महीने पहले 90
टाटा समूह की डिजिटल कंपनी बिगबास्केट के सीईओ हरि मेनन पद छोड़ रहे हैं, उनकी जगह अमेजन के अमित नंदा को कमान सौंपी जाएगी। कंपनी लगातार हो रहे भारी घाटे के बीच यह बड़े बदलाव कर रही है।

नेतृत्व में बड़े बदलाव की तैयारी

टाटा समूह की डिजिटल इकाई बिगबास्केट में शीर्ष स्तर पर बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। कंपनी के सह-संस्थापक और वर्तमान सीईओ हरि मेनन अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उनकी जगह अब अमेजन के अनुभवी अधिकारी अमित नंदा को नया सीईओ नियुक्त किया गया है। यह निर्णय टाटा संस की बोर्ड बैठक में कंपनी के प्रदर्शन पर जताई गई नाराजगी के बाद लिया गया है। चेयरमैन नोएल टाटा ने समूह की डिजिटल कंपनियों के कामकाज और घाटे को लेकर अपनी असहमति जाहिर की थी, जिसके बाद प्रबंधन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई है।

लगातार घाटे से जूझ रही कंपनी

टाटा समूह ने साल 2021 में 1.2 अरब डॉलर में बिगबास्केट का अधिग्रहण किया था। हालांकि, कंपनी की वित्तीय स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। टाटा डिजिटल ने अगले तीन वर्षों में 45 फीसदी ग्रोथ का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन फिलहाल कंपनी भारी नुकसान झेल रही है। प्रबंधन का अनुमान है कि अगले तीन वर्षों तक कंपनी को सालाना 3,000 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ सकता है, जिसके बाद ही मुनाफे की स्थिति बनने की उम्मीद है।

वित्तीय आंकड़ों पर दबाव

कंपनी के वित्त वर्ष 2025 के आंकड़े चिंताजनक रहे हैं, जिसने समूह के भीतर दबाव बढ़ा दिया है:

  • वित्तीय वर्ष 2025 में कंपनी का घाटा बढ़कर 4,610 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष 4,246 करोड़ रुपये था।
  • कंपनी का रेवेन्यू भी पिछले वर्ष के 37,355 करोड़ रुपये से घटकर 32,188 करोड़ रुपये पर आ गया है।
  • इतने घाटे के बावजूद टाटा समूह ने वित्तीय वर्ष 2025 में कंपनी में 4,000 करोड़ रुपये की पूंजी निवेश की है।

प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां

बिगबास्केट को बाजार में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। क्विक कॉमर्स सेक्टर में मौजूद अन्य कंपनियां जैसे ब्लिंकिट और जेप्टो का मूल्यांकन क्रमशः 13 अरब डॉलर और 7 अरब डॉलर आंका जा रहा है। भारी नुकसान के कारण बिगबास्केट का मूल्यांकन अभी तय नहीं किया जा सका है। टाटा समूह के लिए फिलहाल एयर इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और टाटा डिजिटल तीनों ही क्षेत्रों में घाटा कम करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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