नाना पाटेकर का कार्डियक अरेस्ट से निधन, क्या है यह खतरनाक स्थिति और कैसे बचाएं जान? स्वास्थ्य 8 घंटे पहले 4
प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। जानिए कार्डियक अरेस्ट के लक्षण, इसके खतरे और सही समय पर सीपीआर (CPR) देकर किसी की जान बचाने के तरीके।

फिल्म जगत के जाने-माने अभिनेता नाना पाटेकर का आज सुबह 5:20 बजे दुखद निधन हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नाना पाटेकर अपने आवास पर थे तभी उन्हें अचानक गंभीर कार्डियक अरेस्ट का सामना करना पड़ा। उनके परिवार के सदस्य उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों के लाख प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) देने की कोशिश की, लेकिन दिल की धड़कन वापस नहीं लौट सकी और कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया।

कार्डियक अरेस्ट की गंभीरता

कार्डियक अरेस्ट एक अत्यंत गंभीर चिकित्सा आपातकाल है। मैक्स हॉस्पिटल के कार्डियक साइंस विभाग के चेयरमैन डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, अक्सर नींद में होने वाली मौत का मुख्य कारण एरिथमिया (असामान्य धड़कन) होता है। उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति जिम में व्यायाम करते, साइकिल चलाते, डांस करते या किसी भी अन्य गतिविधि के दौरान अचानक गिर जाता है और मौत हो जाती है, तो इसका एक बड़ा कारण लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम (Long QT Syndrome) हो सकता है। इसके अलावा, आनुवंशिक विकारों और रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने से भी दिल की धड़कन अचानक रुक सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि हर किसी को हाई सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट करवाना चाहिए, विशेषकर उन लोगों को जिनके परिवार में हृदय रोगों का इतिहास रहा है।

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर

कार्डियक अरेस्ट की स्थिति तब पैदा होती है जब हृदय अचानक और बिना किसी पूर्व संकेत के रक्त को पंप करना बंद कर देता है। इस कारण मस्तिष्क और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त की आपूर्ति पूरी तरह रुक जाती है। विभिन्न प्रकार की एरिथमिया स्थितियां कार्डियक अरेस्ट का कारण बनती हैं। इस दौरान व्यक्ति की पल्स और ब्लड प्रेशर पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं। चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक और जानलेवा स्थिति मानी जाती है क्योंकि इसमें मरीज के पास संभलने का समय बहुत कम होता है।

सीपीआर के जरिए जीवन रक्षक उपाय

कार्डियक अरेस्ट के समय सीपीआर (CPR) का सही इस्तेमाल मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है। इसे देने की प्रक्रिया निम्नलिखित है:

  • सबसे पहले अपने बाएं हाथ को सीधा आगे की ओर रखें।
  • अब अपने दाएं हाथ को बाएं हाथ के ऊपर रखें और उंगलियों को आपस में गूंथ लें।
  • मरीज की छाती के बीच वाले हिस्से पर अपनी हथेलियों से जोर से दबाव डालें।
  • एक रिदम के साथ प्रति मिनट 100 से 120 बार चेस्ट कंप्रेशन करें।
  • कंप्रेशन के बाद मरीज को मुंह के जरिए कृत्रिम सांस देने का प्रयास करें।
  • लगातार 30 सेकंड तक इस प्रक्रिया को दोहराएं।

विभिन्न अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि यदि कार्डियक अरेस्ट आने के 5 मिनट के भीतर पीड़ित को सही तकनीक के साथ सीपीआर दिया जाए और उसे अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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