बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों का बड़ा हमला, ग्वादर जा रहा चीन का कार्गो फूंका, ड्राइवर का अपहरण विश्व एक घंटा पहले 5
पाकिस्तान के नासिराबाद इलाके में बलूच विद्रोहियों ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से जुड़े कार्गो काफिले पर हमला कर दो ट्रेलरों को आग के हवाले कर दिया है। इस घटना में एक ड्राइवर को अगवा कर लिया गया है, जिसने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और चीन के निवेश पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

पाकिस्तान में बलूच लड़ाकों का खौफनाक तांडव

पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान से एक बार फिर सुरक्षा तंत्र को चुनौती देने वाली खबर सामने आई है। नासिराबाद के निकट बलूच विद्रोहियों ने एक बड़े हमले को अंजाम दिया है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर चीन के आर्थिक हितों को निशाना बनाया है। यह घटना उस समय हुई जब चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत ग्वादर बंदरगाह की ओर जाने वाला एक भारी कार्गो काफिला वहां से गुजर रहा था। हथियारों से लैस हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाते हुए काफिले को रुकने पर मजबूर किया। इस दौरान हमलावरों ने दो बड़े ट्रेलरों को आग के हवाले कर दिया, जिससे उसमें लदा हुआ कीमती सामान पूरी तरह जलकर राख हो गया। इतना ही नहीं, हमलावर एक ड्राइवर को बंदूक की नोक पर अगवा करके अपने साथ पास की दुर्गम पहाड़ियों की ओर ले गए।

पाकिस्तानी सेना की नाकामी की पोल खुली

इस हमले ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली और उनकी तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय चश्मदीदों के अनुसार, जब विद्रोही सड़कों पर खुलेआम ट्रकों को आग लगा रहे थे और गोलियां बरसा रहे थे, उस समय वहां सुरक्षा के लिए तैनात सेना या पुलिस का कोई भी जवान मौजूद नहीं था। सुरक्षा बलों की यह अनुपस्थिति बलूचिस्तान में पाकिस्तान की कमजोर पकड़ को दर्शाती है। हमले के काफी देर बाद जब प्रशासन और फ्रंटियर कोर हरकत में आई, तब तक हमलावर अपने बंधक के साथ सुरक्षित ठिकानों पर गायब हो चुके थे। फिलहाल, पूरे इलाके की घेराबंदी करके सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि अगवा किए गए ड्राइवर को बरामद किया जा सके, हालांकि अब तक किसी भी समूह ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

चीन और पाकिस्तान के साझा आर्थिक सपनों पर ग्रहण

यह हमला केवल दो वाहनों को जलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और CPEC की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रहार है। ग्वादर बंदरगाह, जो अरब सागर के तट पर फारस की खाड़ी के मुहाने के पास स्थित है, रणनीतिक दृष्टि से चीन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यहां से दुनिया का बड़ा तेल व्यापार गुजरता है। इस बंदरगाह का संचालन चीनी कंपनी 'चाइना ओवरसीज पोर्ट होल्डिंग कंपनी' (COPHC) कर रही है। बलूच अलगाववादियों का तर्क है कि पाकिस्तान और चीन मिलकर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों, जैसे कि तेल, गैस और खनिजों का शोषण कर रहे हैं, जबकि स्थानीय आबादी आज भी गरीबी और दमन का शिकार है। इसी आक्रोश के कारण वे ग्वादर प्रोजेक्ट से जुड़ी हर कड़ी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

बलूच विद्रोहियों की बदलती रणनीति

बलूच विद्रोहियों ने अब अपनी कार्ययोजना में बड़ा बदलाव किया है। वे अब केवल सुरक्षा चौकियों पर हमले नहीं कर रहे, बल्कि आर्थिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाले लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को सीधे निशाना बना रहे हैं। ट्रकों को फूंकना और ड्राइवरों का अपहरण करना एक सोची-समझी रणनीति है ताकि निजी ट्रांसपोर्ट कंपनियों और ट्रक मालिकों में डर पैदा किया जा सके। यदि बलूच विद्रोही इस तरह के व्यापारिक रास्तों को सुरक्षित नहीं रहने देंगे, तो भविष्य में ग्वादर तक कोई भी सामान पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा। इससे चीन द्वारा किए गए अरबों डॉलर के निवेश पर पानी फिर सकता है और यह प्रोजेक्ट महज कागजों तक सीमित रह सकता है।

बीजिंग का बढ़ता दबाव और इस्लामाबाद की बेबसी

इस घटना के बाद से चीन का गुस्सा बढ़ना स्वाभाविक है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष अधिकारी लंबे समय से पाकिस्तान से अपने नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली और उसकी सैन्य खुफिया एजेंसियों की विफलता के कारण बलूचिस्तान में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। शाहबाज सरकार पहले से ही देश में गहरे आर्थिक संकट से जूझ रही है, और ऐसी घटनाओं का होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता को और कम करता है। चीनी कंपनियों का भरोसा टूटना पाकिस्तान के लिए किसी बड़ी राष्ट्रीय आपदा से कम नहीं है, क्योंकि उसकी पूरी अर्थव्यवस्था फिलहाल विदेशी निवेश पर ही टिकी हुई है।

ग्वादर का भविष्य और अनसुलझे सवाल

नासिराबाद की यह घटना इस बात की गवाही है कि बलूच विद्रोहियों का नेटवर्क कितना संगठित और सशक्त हो चुका है। पाकिस्तानी सेना द्वारा चलाए जा रहे तलाशी अभियानों के बावजूद, वे बार-बार सुरक्षा बलों को चकमा देने में कामयाब हो रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि जब तक पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान के लोगों की बुनियादी समस्याओं, मानवाधिकारों और उनकी जायज मांगों का स्थायी और राजनीतिक समाधान नहीं निकालती, तब तक इस क्षेत्र में बारूद का धुआं और गोलियों की गूंज बनी रहेगी। आने वाले समय में ग्वादर जाने वाली सड़कों पर सुरक्षा का संकट और गहरा हो सकता है, जो सीधे तौर पर चीन और पाकिस्तान के बीच के संबंधों की परीक्षा लेगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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