भारत में स्टारलिंक की राह में कौन डाल रहा रोड़े, एलन मस्क के तीखे आरोपों के पीछे की पूरी कहानी राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 6
एलन मस्क ने अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को भारत में शुरू करने में आ रही बाधाओं के लिए देश के कुछ बड़े कारोबारियों को जिम्मेदार ठहराया है। मस्क का आरोप है कि ये प्रभावशाली लोग अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए उनकी कंपनी के रास्ते में रुकावट पैदा कर रहे हैं।

भारत के बाजार पर मस्क की नजर और मौजूदा विवाद

दुनिया भर में इंटरनेट की पहुंच को नई दिशा देने वाले एलन मस्क अब भारत के विशाल डिजिटल बाजार में अपनी पैठ बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। स्टारलिंक के माध्यम से सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा शुरू करने की उनकी महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल कई तकनीकी और प्रशासनिक मोर्चों पर अटकी हुई है। इस बीच, स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने एक बेहद गंभीर बयान देकर खलबली मचा दी है। उनका आरोप है कि भारत में कुछ चुनिंदा कारोबारी, जिन्हें उन्होंने ओलिगार्क की संज्ञा दी है, वे जानबूझकर स्टारलिंक की एंट्री को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। मस्क का कहना है कि ये लोग भारतीय टेलीकॉम सेक्टर पर अपनी पुरानी पकड़ और एकाधिकार को किसी भी कीमत पर बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने अपने इस सोशल मीडिया पोस्ट में किसी विशेष कंपनी या व्यक्ति का नाम नहीं लिया है।

सोशल मीडिया पर मस्क का गुस्सा

मस्क का यह बयान तब सामने आया जब उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट का उत्तर दिया। उस पोस्ट में यह चिंता जताई गई थी कि भारत के हजारों गांवों में आज भी मोबाइल कनेक्टिविटी का भारी अभाव है। इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्क ने स्पष्ट रूप से लिखा कि दुर्भाग्यवश कुछ बड़े और ताकतवर कारोबारी स्टारलिंक के आने में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। उन्होंने इसे भारत की जनता के खिलाफ एक प्रकार का अपराध करार दिया। मस्क के अनुसार, ये शक्तियां अपने फायदे के लिए आम भारतीय नागरिकों को बेहतर इंटरनेट तकनीक से वंचित रखना चाहती हैं।

कनेक्टिविटी और भारतनेट पर आंकड़े

एक्स पर हुई इस बहस में उन आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया जो भारतीय गांवों में इंटरनेट की स्थिति को बयां करते हैं। डॉजडिजाइनर नाम के एक अकाउंट ने जानकारी दी कि मई 2026 तक भारत के करीब 11,256 गांवों में अभी भी 4G कनेक्टिविटी नहीं पहुंची थी। इसके अतिरिक्त, सरकार के प्रमुख कार्यक्रम भारतनेट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के तहत 8.5 लाख से अधिक रूट-किलोमीटर फाइबर बिछाने का दावा किया गया है और 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को सेवा के लिए तैयार बताया गया है। लेकिन वास्तविकता यह है कि जून 2026 तक इनमें से सिर्फ 80,472 ग्राम पंचायतों में ही ऑपरेशनल पॉइंट ऑफ प्रेजेंस यानी पीओपी की सुविधा चालू हो पाई थी। इसके अलावा, मार्च 2026 के आंकड़ों को देखें तो भारत के कुल इंटरनेट सब्सक्रिप्शन में मात्र 4.26 फीसदी ही वायर्ड कनेक्शन थे, जो एक बड़े गैप को दर्शाते हैं।

स्टारलिंक को अब तक कहां मिली सफलता

भले ही मस्क भारत में अपनी सर्विस शुरू करने के लिए बेसब्र हैं, लेकिन प्रक्रिया पूरी तरह थमी नहीं है। जुलाई 2025 में इन-स्पेस द्वारा कंपनी को जेन 1 नेटवर्क के लिए 5 साल की मंजूरी दी गई थी। फिलहाल स्टारलिंक स्पेक्ट्रम आवंटन और अंतिम सुरक्षा क्लीयरेंस मिलने की प्रतीक्षा कर रही है। साथ ही, कंपनी ने डायरेक्ट-टू-डिवाइस यानी डी2डी कनेक्टिविटी के लिए जेन 2 सैटेलाइट नेटवर्क के वास्ते फिर से आवेदन दायर किया है, जिस पर अभी मुहर लगना बाकी है। भारत में इस तरह की सेवाओं के संचालन के लिए सैटेलाइट ऑपरेटरों को इन-स्पेस की कड़ी मंजूरी प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य है।

सुरक्षा और डेटा गोपनीयता का पेच

स्टारलिंक की राह में केवल व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा ही नहीं, बल्कि नियामक शर्तें भी एक बड़ी चुनौती हैं। सरकार का रुख स्पष्ट है कि किसी भी विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट प्रदाता को भारत के कड़े सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा सुरक्षित रहे और उसे स्थानीय स्तर पर ही संरक्षित किया जाए। इसके अलावा, आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों को नेटवर्क की निगरानी करने का अधिकार भी चाहिए। जब तक इन सुरक्षा मानकों पर स्टारलिंक अपनी अंतिम सहमति और तकनीकी तैयारी पूरी नहीं करती, तब तक अंतिम लाइसेंस मिलना मुश्किल है।

मस्क की उच्च-स्तरीय कूटनीति

एलन मस्क भारत में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए पिछले कुछ वर्षों से लगातार भारतीय नेतृत्व के साथ संवाद कर रहे हैं। इस सिलसिले की शुरुआत जून 2023 में हुई थी, जब अमेरिका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मस्क के बीच पहली मुलाकात हुई थी। इसके बाद फरवरी 2025 में दोबारा हुई मुलाकात में उन्होंने स्पेस और टेक्नोलॉजी के साथ-साथ स्टारलिंक पर विस्तार से चर्चा की। वहीं अप्रैल 2025 में भी दोनों के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। कंपनी के अधिकारी भी लगातार सक्रिय हैं। अप्रैल 2025 में कंपनी के अधिकारियों ने पीयूष गोयल से मुलाकात की थी। इसके बाद जून 2025 और दिसंबर 2025 में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ स्टारलिंक के प्रतिनिधियों की अहम बैठकें हुईं। सिलसिला यहीं नहीं रुका, अप्रैल 2026 में भी स्पेसएक्स की प्रेसीडेंट और स्टारलिंक के वाइस प्रेसीडेंट ने सिंधिया के साथ भारत में निवेश और विस्तार पर चर्चा की थी।

भारत का बाजार क्यों है इतना आकर्षक

भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाजारों में शुमार है और इसकी विकास दर किसी भी टेक कंपनी के लिए मुफीद है। मार्च 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में 109 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर थे, जिनमें 106.6 करोड़ ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर शामिल थे। वहीं, वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबरों की संख्या 126.6 करोड़ के पार थी। स्टारलिंक का मुख्य लक्ष्य वे सुदूर और ग्रामीण इलाके हैं जहां भौगोलिक कठिनाइयों के कारण फाइबर केबल या मोबाइल टॉवर लगाना व्यावहारिक नहीं है। सैटेलाइट इंटरनेट इन क्षेत्रों में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन का भविष्य काफी उज्ज्वल माना जा रहा है, यही वजह है कि स्टारलिंक इस बाजार को किसी भी कीमत पर हाथ से नहीं जाने देना चाहती।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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