बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
आज के दौर में जहां ज्यादातर लोग रोजगार के नए-नए रास्ते तलाश रहे हैं, वहीं मुजफ्फरपुर के रहने वाले अरविंद कुमार मिश्रा ने गोबर और पंचगव्य पर आधारित उत्पादों को ही अपनी अलग पहचान बना लिया है। गोबर, गोमूत्र और दूसरी प्राकृतिक सामग्रियों की मदद से वे करीब 15 तरह के उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इनकी मांग अब केवल बिहार के कई जिलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि राजस्थान समेत दूसरे राज्यों से भी आने लगी है।
पंचगव्य के आधार पर बनते हैं ज्यादातर उत्पाद
अरविंद कुमार मिश्रा बताते हैं कि उनके बनाए जाने वाले अधिकांश उत्पाद पंचगव्य के आधार पर तैयार होते हैं। पंचगव्य में दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कुछ उत्पादों में जड़ी-बूटियों और कम हानिकारक रसायनों का भी प्रयोग किया जाता है, ताकि वे अधिक उपयोगी और सुरक्षित बन सकें।
कौन-कौन से उत्पाद करते हैं तैयार
उनके उत्पादों में धूप, अगरबत्ती, दंतमंजन, घर की सजावट से जुड़ी चीजें, हर्बल शैंपू, दीपक और सांबरानी कप जैसी कई वस्तुएं शामिल हैं। इसके अलावा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के मकसद से वे जैविक उर्वरक और प्राकृतिक कीटनाशक भी बनाते हैं।
इन उत्पादों का इस्तेमाल धार्मिक कार्यों, घरेलू जरूरतों और खेती-किसानी तीनों में हो रहा है।
दूध न देने वाली गायें भी रहेंगी उपयोगी
अरविंद का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ व्यवसाय करना नहीं है, बल्कि गौ संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और लोगों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। उनका मानना है कि जिन गायों से दूध नहीं मिलता, उन्हें अक्सर लोग छोड़ देते हैं। यदि ऐसी गायों के गोबर और गोमूत्र से ज्यादा से ज्यादा उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएं, तो पशुपालकों की आमदनी बढ़ सकती है और गौवंश संरक्षण को भी बल मिलेगा।
प्रदूषण कम करने में भी मददगार
उन्होंने बताया कि गोबर पर आधारित उत्पाद पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद हैं। इनसे प्रदूषण घटाने में मदद मिलती है और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है। यही वजह है कि उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और वे कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं।
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