जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने से नाराज मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, राष्ट्रव्यापी अभियान तेज करने का निर्णय भारत एक दिन पहले 15
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति न दिए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है और देश भर में विरोध मुहिम जारी रखने की घोषणा की है।

दिल्ली पुलिस के फैसले पर जताई नाराजगी

नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति न मिलने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने जानकारी दी कि तय कार्यक्रम के अनुसार आज जंतर-मंतर पर धरना होना था, लेकिन प्रदर्शन से महज एक दिन पहले दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक पत्र भेजकर इसकी अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। बोर्ड के पदाधिकारियों ने इसे सीधे तौर पर अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया है।

भीड़ का हवाला देकर रोकी गई अनुमति

पुलिस की कार्रवाई पर विस्तार से बात करते हुए सैयद कासिम रसूल इलियास ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि इस प्रदर्शन में लोगों की भारी भीड़ उमड़ने की प्रबल संभावना है। पुलिस प्रशासन के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में जुटने वाले लोगों की व्यवस्था करना और कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी आधार का उपयोग करते हुए पुलिस ने धरने के लिए इजाजत नहीं दी।

सेव कॉन्स्टिट्यूशन, सेव इंडिया मुहिम पर जोर

बोर्ड वर्तमान में 'सेव कॉन्स्टिट्यूशन, सेव इंडिया' यानी 'संविधान बचाओ, भारत बचाओ' नामक एक व्यापक अभियान चला रहा है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि इस अभियान के माध्यम से वे कई अहम मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे हैं। इसमें विशेष रूप से समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की कवायद, देश भर में मस्जिदों को ढहाने की घटनाएं और मदरसों पर लगाई जा रही पाबंदियों जैसे विषय शामिल हैं, जिन पर बोर्ड ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है। हालांकि, इन दावों और लगाए गए आरोपों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों का कोई आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।

देशभर में जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन

बोर्ड के महासचिव अब्दुररहीम मुजद्दिदी ने साफ कर दिया है कि जंतर-मंतर पर अनुमति न मिलने से उनके हौसले पस्त नहीं हुए हैं। उन्होंने ऐलान किया कि उनकी यह मुहिम देश के हर कोने में जारी रहेगी और भविष्य में अलग-अलग शहरों में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे।

UCC को लेकर क्या है चिंता

समान नागरिक संहिता (UCC) का विरोध कर रहे संगठनों और विभिन्न धार्मिक समुदायों का मानना है कि एक समान कानून लाने की आड़ में उनके निजी कानूनों और धार्मिक रीति-रिवाजों को प्रभावित किया जा सकता है। इन समुदायों का तर्क है कि शादी, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार से संबंधित नियम सीधे तौर पर उनकी धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं, इसलिए किसी भी बदलाव से पहले समुदायों की विशिष्ट पहचान और उनके अधिकारों का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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