बिहार
13 घंटे पहले
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विचारों
नई सोच और आधुनिक तकनीक के साथ जब कोई किसान खेती में उतरता है, तो उसके खेत सिर्फ अनाज नहीं, बल्कि सफलता की नई कहानियां भी उगाने लगते हैं। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के किसान संजय सिंह ने यह बात सच कर दिखाई है। पारंपरिक फसलों के साथ नींबू की बागवानी अपनाकर उन्होंने न केवल अपनी आय में बढ़ोतरी की, बल्कि आसपास के किसानों के सामने एक मिसाल भी पेश की है।
पारंपरिक खेती के साथ बागवानी का सफल प्रयोग
पूर्वी चंपारण जिले के पकड़ीदयाल अनुमंडल अंतर्गत राजेपुर नवादा पंचायत के रहने वाले संजय सिंह आज क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। धान और गेहूं की पारंपरिक खेती के साथ-साथ उन्होंने बड़े पैमाने पर नींबू की खेती शुरू की, जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वे दूसरे किसानों को भी बागवानी अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
संजय सिंह ने खेती में नवाचार और आधुनिक तकनीक का सफल इस्तेमाल कर एक नई मिसाल कायम की है। नतीजा यह है कि आज उनके बगीचे में सैकड़ों पौधे फल दे रहे हैं और उनकी पहचान क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों में होने लगी है। कहा जाए तो नींबू की खेती ने उनकी जिंदगी ही बदल दी है।
3 से 4 एकड़ में 400 से अधिक पौधे
संजय सिंह ने करीब 3 से 4 एकड़ जमीन में नींबू के 400 से अधिक पौधे लगाए हैं। फिलहाल सभी पौधे फल देने लगे हैं और खेतों में लदे नींबू उनकी मेहनत तथा आधुनिक खेती तकनीक की सफलता की गवाही दे रहे हैं।
उनका कहना है कि नींबू की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है, जबकि मुनाफा कहीं अधिक होता है। यही वजह है कि वे किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ फलदार पौधों की खेती अपनाने की सलाह देते हैं।
प्रशासन की पहल और ड्रिप सिंचाई
संजय सिंह ने बताया कि तत्कालीन जिलाधिकारी एवं वर्तमान पथ निर्माण विभाग के सचिव कपिल अशोक की पहल पर उन्हें लगभग 400 नींबू के पौधे उपलब्ध कराए गए थे। इसके साथ ही उनके खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली भी लगाई गई, जिससे पानी की बचत होती है और पौधों को समय पर पर्याप्त नमी मिलती रहती है। इससे उत्पादन में भी इजाफा हुआ है।
नींबू की मांग बाजारों के साथ-साथ आसपास के इलाकों में भी बनी रहती है। व्यापारी सीधे उनके खेत से नींबू खरीदकर अलग-अलग बाजारों में बेचते हैं, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिल जाती है।
पपीते की खेती से भी मिल चुकी है कामयाबी
नींबू के अलावा संजय सिंह इससे पहले पपीते की खेती से भी अच्छा मुनाफा कमा चुके हैं, जिसकी प्रशासनिक स्तर पर सराहना भी हुई थी। उनकी कामयाबी यह बताती है कि अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ बागवानी और आधुनिक सिंचाई तकनीक को अपनाएं, तो कम लागत में बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है।
संजय सिंह की यह पहल न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी खेती में नए प्रयोग करने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही है।
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