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एक घंटा पहले
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झारखंड में मानसून के आगमन के साथ ही किसानों के बीच मक्के की खेती की तैयारी ने रफ्तार पकड़ ली है। इसी बीच कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे फसल को बारिश के दुष्प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए मेढ़ विधि का सहारा लें।
क्या है मेढ़ विधि और कैसे करती है काम
देवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा बताते हैं कि इस तकनीक के तहत फसल को ऊंची मेढ़ों पर लगाया जाता है और दो मेढ़ों के बीच नालियां छोड़ दी जाती हैं। इस व्यवस्था से बारिश का अतिरिक्त पानी बिना किसी रुकावट के बाहर निकल जाता है, जिससे खेत में जलभराव नहीं होता।
जड़ों और पौधों को मिलती है मजबूती
विशेषज्ञ के अनुसार इस विधि से जड़ों में सड़न और गलन का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। इसके अलावा मेढ़ों पर मिट्टी चढ़ाने से पौधे तेज हवा और आंधी के बीच भी डटे रहते हैं और गिरने से बचते हैं।
उन्नत किस्म और खरपतवार नियंत्रण की सलाह
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को VNR, 4226 और शक्तिवर्धक जैसी उन्नत किस्मों के बीज इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। साथ ही खरपतवार पर काबू पाने के लिए एट्राजीन के प्रयोग की भी सलाह दी गई है।
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