मखाना खरीदने का सही समय: जुलाई और अगस्त में सबसे कम होती हैं कीमतें, बाद में दोगुने हो जाते हैं दाम बिहार एक महीने पहले 70
अगर आप मखाना खाने के शौकीन हैं या घर के लिए इसे स्टॉक करना चाहते हैं, तो जुलाई और अगस्त का समय इसके लिए सबसे उपयुक्त है। बाजार के जानकारों के अनुसार, त्योहारों के सीजन में मखाने के दाम काफी बढ़ जाते हैं, इसलिए अभी इसे खरीदना सबसे अधिक किफायती है।

मखाना खरीदने का सबसे बेहतरीन मौका

बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में दुनिया भर की कुल मखाना खपत का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा उत्पादित किया जाता है। मखाने के बाजार में मांग और आपूर्ति का एक खास चक्र काम करता है, जिसके कारण साल के अलग-अलग महीनों में इसकी कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि जुलाई और अगस्त का समय मखाना खरीदने के लिए साल का सबसे सस्ता और बेहतर वक्त होता है। जो लोग घर में नियमित रूप से मखाने का सेवन करते हैं या फिर आने वाले व्रत-त्योहारों के लिए इसकी प्लानिंग कर रहे हैं, उन्हें इस मौके का फायदा उठाना चाहिए।

कीमतों का गणित और बाजार का चलन

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय मखाना बहुत ही किफायती दरों पर उपलब्ध है। अभी बाजार में 6, 7 और 8 सूता यानी अच्छी क्वालिटी के मखाने 600 रुपये से लेकर 800 से 900 रुपये प्रति किलो तक आसानी से मिल रहे हैं। यह दरें साल भर के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर हैं। इसके विपरीत, अक्टूबर और नवंबर का समय मखाने के लिए सबसे महंगा माना जाता है। इस दौरान बाजार में कीमतें 1200 से 1500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती हैं, जबकि प्रीमियम क्वालिटी का मखाना 2000 रुपये प्रति किलो तक बिक सकता है।

त्योहारी सीजन और बढ़ती डिमांड

विशेषज्ञ अनिल कुमार प्रसाद बताते हैं कि अगस्त के बाद मखाने की कीमतों में भारी उछाल आना तय है। जैसे-जैसे साल के अंतिम महीने करीब आते हैं, नवरात्रि, दीपावली, कोजगरा और महापर्व छठ जैसे बड़े उत्सव शुरू हो जाते हैं। इन त्योहारों के दौरान मखाने की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ता है। मांग इतनी ज्यादा हो जाती है कि दाम दोगुने से तीन गुने तक बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि व्यापारियों और बाजार के विशेषज्ञों की सलाह है कि उपभोक्ताओं को अभी मखाना खरीदकर अपने पास स्टोर कर लेना चाहिए, ताकि त्योहारों के समय उन्हें महंगी कीमतों का सामना न करना पड़े।

क्यों सस्ता होता है मखाना?

जुलाई और अगस्त के महीनों में कीमतों के कम रहने के पीछे एक ठोस व्यावसायिक कारण है। इस दौरान मखाने का पुराना सीजन पूरी तरह से समाप्त हो जाता है और अगले महीने से खेतों से नई फसल आने की शुरुआत होने वाली होती है। व्यापारी अपना पुराना स्टॉक निकालने के लिए कीमतें कम रखते हैं। इसके अलावा, जैसे ही नया मखाना बाजार में आता है, बड़े व्यापारी और फूड प्रोसेसिंग इकाइयां इसे बड़े पैमाने पर खरीद लेती हैं। इस मखाने का उपयोग देश-विदेश भेजने और तरह-तरह के मखाना उत्पाद तैयार करने में किया जाता है, जिससे बाद में बाजार में आपूर्ति कम और मांग अधिक हो जाती है और कीमतें आसमान छूने लगती हैं।

उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी की सलाह

अगर आप सुपरफूड मखाने का नियमित सेवन करते हैं, तो यह समय आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि 6, 7 और 8 सूता साइज का मखाना खाने की दृष्टि से सबसे उत्तम माना जाता है। यदि आप इसे अभी 600 से 900 रुपये की रेंज में खरीदकर रख लेते हैं, तो आप साल भर अपनी जरूरत पूरी करने के साथ-साथ बड़ी बचत भी कर सकते हैं। अगस्त बीतने के बाद मखाने के दाम में स्थिरता नहीं रहती और उपभोक्ताओं को त्योहारों के समय बढ़ी हुई कीमतों पर इसे खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। अतः अपनी गृहस्थी और बजट का ध्यान रखते हुए, अभी मखाना स्टोर करना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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