राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
घर खरीदारों को लुभावने सपने दिखाकर प्रोजेक्ट में मनमाने बदलाव करने वाले बिल्डरों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सख्त तेवर अपना लिए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बिल्डरों को हर हाल में वही सुविधाएँ और प्रोजेक्ट प्लान मुहैया कराना होगा, जिसका वादा उन्होंने मार्केटिंग ब्रोशर में किया था। अदालत ने इन वादों को केवल विज्ञापनों का हिस्सा मानकर खारिज करने की बिल्डरों की दलील को सिरे से नकार दिया है।
गुरुग्राम के प्रोजेक्ट को लेकर जताई नाराजगी
यह मामला गुरुग्राम के डीएलएफ होम डेवलपर्स के आवासीय प्रोजेक्ट द प्राइमस से जुड़ा है, जिसमें भारी अनियमितताएं सामने आई थीं। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डर को फटकार लगाई। विवाद का मुख्य केंद्र वह 24 मीटर चौड़ी सड़क थी, जिसका वादा ब्रोशर में किया गया था लेकिन जमीन पर उसका बड़ा हिस्सा नदारद पाया गया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के बदलाव केवल मामूली हेरफेर नहीं हैं, बल्कि यह खरीदारों के विश्वास के साथ किया गया एक बड़ा खिलवाड़ है।
ब्रोशर के दावों का पालन अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी व्यवस्था में कहा कि घर खरीदार अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा निवेश करते हैं और वे ब्रोशर में दिए गए प्लान पर भरोसा करते हैं। बिल्डर्स इन दावों को बदलकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अगली सुनवाई तक प्रोजेक्ट को ब्रोशर के वादों के मुताबिक नहीं ढाला गया, तो कोर्ट कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य होगा। शीर्ष अदालत का यह निर्देश देश भर के बिल्डरों के लिए एक बड़ा संदेश है कि वे ग्राहकों को दिए गए अपने वादों को पूरा करने के प्रति ईमानदार रहें।
खरीदारों के हितों की सुरक्षा
अदालत की यह टिप्पणी उन लाखों परिवारों के लिए राहत भरी खबर है जो प्रोजेक्ट की लेआउट और सुविधाओं में बदलाव के कारण परेशान होते हैं। अब रियल एस्टेट कंपनियों को निर्माण कार्य में पारदर्शिता बरतनी होगी और ब्रोशर में दिखाई गई सुविधाओं को धरातल पर उतारना ही होगा। कोर्ट का यह कड़ा रवैया स्पष्ट करता है कि बिल्डर्स अब मनमानी करके कानून के शिकंजे से नहीं बच पाएंगे।
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