BRICS में भारत की भूमिका: सलमान खुर्शीद ने बताया कैसे चीन के मुकाबले अपनी धमक बनाए रखेगा देश राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 10
पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संदर्भ में भारत की कूटनीतिक रणनीति पर चर्चा की है। उन्होंने कहा कि भारत गुटनिरपेक्षता की विरासत का उपयोग करते हुए वैश्विक मंच पर चीन के सामने एक स्वतंत्र और मजबूत शक्ति के रूप में खुद को स्थापित कर सकता है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारत की बदलती कूटनीति

नई दिल्ली में आयोजित हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत की कूटनीतिक दिशा और रणनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने इस आयोजन को वैश्विक राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। एक विशेष बातचीत के दौरान, खुर्शीद ने कहा कि मौजूदा समय में जब दुनिया विभिन्न ध्रुवों में बंटी हुई महसूस हो रही है, तब ब्रिक्स का यह मंच एक वैकल्पिक वैश्विक व्यवस्था को जन्म देने की क्षमता रखता है।

उनका मानना है कि भारत इस बदलाव में एक स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभा सकता है। खुर्शीद ने कहा कि ब्रिक्स के माध्यम से न केवल विकासशील राष्ट्रों की आवाज को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी रणनीतिक धाक भी जमा सकेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को खुद को किसी का छोटा सहयोगी साबित करने के बजाय एक स्वतंत्र और मजबूत वैश्विक शक्ति के रूप में पेश करना चाहिए।

चीन और सीमा विवाद पर स्पष्ट रुख

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे और द्विपक्षीय संबंधों पर अपनी राय रखते हुए सलमान खुर्शीद ने स्पष्ट किया कि सीमा से जुड़े मुद्दे और आपसी विश्वास को अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी की जमीनी हकीकत को लेकर देश के सामने पूरी पारदर्शिता अपनानी चाहिए। उनके अनुसार, कूटनीति के पटल पर भरोसे का होना अनिवार्य है और चीन के साथ रिश्तों को सुधारने के लिए सीमा पर स्पष्टता सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

पश्चिम एशिया और भू-राजनीतिक चुनौतियां

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्षों पर चिंता जताते हुए पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स का मंच भारत के लिए एक बेहतरीन अवसर है। उन्होंने दावा किया कि भारत में यह क्षमता है कि वह संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे विपरीत विचारधारा वाले देशों को एक ही मेज पर बैठा सके और उनके बीच कूटनीतिक सहमति बनाने में सफल हो सके। खुर्शीद के मुताबिक, भारत का इतिहास और उसकी गुटनिरपेक्षता की नीति उसे मध्यस्थ की भूमिका निभाने में सक्षम बनाती है। उन्होंने कहा कि भारत को किसी एक पक्ष की ओर झुकने के बजाय ब्रिक्स के मंच का उपयोग करते हुए तटस्थ और प्रभावी नेतृत्व पेश करना चाहिए।

आतंकवाद और अन्य वैश्विक प्राथमिकताएं

ब्रिक्स के बढ़ते दायरे पर चर्चा करते हुए खुर्शीद ने आतंकवाद को एक वैश्विक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के लिए यह एक गंभीर समस्या है और इससे निपटने की जिम्मेदारी सामूहिक है। उन्होंने कहा, आतंकवाद को जड़ से खत्म करना भारत की बड़ी प्राथमिकता है और हर मंच से इस पर कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की कूटनीति केवल आतंकवाद तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने जलवायु परिवर्तन और आर्थिक अनिश्चितता जैसे अन्य बड़े संकट भी मौजूद हैं। भारत को ब्रिक्स के जरिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि सदस्य देशों के बीच व्यापार, प्रोडक्शन चैन और सप्लाई चैन में बेहतर तालमेल बिठाया जा सके। उन्होंने भरोसा जताया कि यदि भारत अपनी पुरानी नीतियों की जड़ों को आधुनिक कूटनीति के साथ सही ढंग से जोड़कर आगे बढ़ता है, तो उसे वैश्विक स्तर पर बड़ी सफलता मिलेगी।

निष्कर्ष

अंत में, सलमान खुर्शीद ने स्पष्ट किया कि पूरी दुनिया इस समय नई दिल्ली की ओर टकटकी लगाए देख रही है। यदि भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सभी देशों को एक दिशा में जोड़ने में सफल रहता है, तो यह देश की विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। भारत के पास गुटनिरपेक्षता की जो मजबूत विरासत है, उसका सही इस्तेमाल करके वह दुनिया को नया नेतृत्व दे सकता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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