THAAD और पैट्रियट जैसे एयर डिफेंस सिस्टम को छकाने वाले ईरानी ड्रोन का 'क्लोन' बना रहा पाकिस्तान, भारतीय शहर निशाने पर? विश्व 6 घंटे पहले 14
आर्थिक कंगाली से जूझ रहा पाकिस्तान चोरी-छिपे नया आत्मघाती ड्रोन D-248 विकसित कर रहा है, जिसे ईरान के खतरनाक Shahed-135 का क्लोन बताया जा रहा है और इसकी रेंज में भारत के कई अहम शहर आ सकते हैं।

कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान की जनता भले ही बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हो, लेकिन वहां का सैन्य तंत्र अपने सीमित संसाधनों का बड़ा हिस्सा हथियार जुटाने और नए युद्ध उपकरण बनाने में फूंक रहा है। विदेशी कर्ज के सहारे अपनी अर्थव्यवस्था चलाने वाला यह देश लगातार अपनी सेना को आधुनिक बनाने की कोशिशों में लगा है। इसी कड़ी में हाल ही में पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने देश की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री का दौरा किया। इस दौरे के दौरान एक ऐसे घातक हथियार का प्रदर्शन किया गया, जिसने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान एक ऐसा ड्रोन तैयार कर रहा है जो भारत के लगभग सभी बड़े शहरों को अपनी जद में ले सकता है। इस नए मानवरहित विमान को ईरान के बेहद खतरनाक और चर्चित Shahed-135 ड्रोन का क्लोन माना जा रहा है।

कंगाल पाकिस्तान और हथियारों की होड़

वैश्विक मंचों पर खुद को शांतिदूत के रूप में पेश करने वाला पाकिस्तान पर्दे के पीछे लगातार युद्ध की तैयारियों में लगा हुआ है। घरेलू स्तर पर आर्थिक बदहाली और महंगाई से त्रस्त होने के बाद भी पाकिस्तान का पूरा ध्यान अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने पर है। इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान की रक्षा कंपनी हेवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला ने एक बेहद आधुनिक और लंबी दूरी तक मार करने वाला UAS तैयार किया है। इस डेल्टा विंग लॉइटरिंग ड्रोन को D-248 नाम दिया गया है। जब इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया, तो रक्षा क्षेत्र के जानकारों ने तुरंत पहचान लिया कि इसका डिजाइन और संरचना ईरान के प्रसिद्ध Shahed-135 ड्रोन से काफी मिलती-जुलती है।

कितनी खतरनाक है इसकी रेंज और क्या हैं इसके दावे?

पाकिस्तानी सेना इस नए ड्रोन सिस्टम को लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले हथियार के रूप में पेश कर रही है। हालांकि इसकी वास्तविक क्षमताओं को लेकर अभी पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन पाकिस्तानी सैन्य सूत्रों द्वारा किए जा रहे दावे बेहद चौंकाने वाले हैं।

  • इस नए ड्रोन की ऑपरेशनल रेंज 2200 किलोमीटर से लेकर 3000 किलोमीटर तक बताई जा रही है।
  • इसका एंड्योरेंस यानी हवा में लगातार उड़ान भरने की क्षमता 12 से 14 घंटे की आंकी गई है।
  • यह मारक क्षमता पाकिस्तान के पास मौजूद वर्तमान मिसाइल प्रणालियों की तुलना में भी अधिक है।

इन भारी-भरकम दावों के कारण ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तकनीक की सत्यता और इसके तकनीकी स्रोतों को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। अगर पाकिस्तान के ये दावे सच साबित होते हैं, तो भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित देश के लगभग सभी प्रमुख शहर इस पाकिस्तानी ड्रोन की सीधी रेंज में आ जाएंगे। हालांकि, पाकिस्तान ने अभी तक इस ड्रोन के प्रोपल्शन सिस्टम, गाइडेंस पैकेज या इसके वास्तविक ऑपरेशनल स्टेटस के बारे में किसी भी तरह की पुख्ता जानकारी साझा नहीं की है। इसकी घोषित रेंज पाकिस्तान की स्वदेशी बाबर क्रूज मिसाइल और शाहीन बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों से भी कहीं अधिक है, जिसके कारण विशेषज्ञ इस पर संदेह जता रहे हैं।

डिजाइन की समानता और चीनी कनेक्शन पर संदेह

इस ड्रोन के बाहरी ढांचे को देखने से साफ पता चलता है कि इसमें ईरान की तकनीक की नकल की गई है। इसका त्रिकोणीय डेल्टा विंग, छोटा और सुगठित फ्यूजलेज, पीछे की तरफ लगा कंट्रोल सरफेस और पुशर-प्रोपेलर कॉन्फिगरेशन इसे बाहरी तौर पर पूरी तरह से ईरान की प्रसिद्ध Shahed-136 सीरीज जैसा दिखाता है। इसके अलावा, इसके डिजाइन के कुछ हिस्से चीनी मानवरहित प्रणालियों से भी मेल खाते हैं।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पाकिस्तान का रक्षा उद्योग पिछले 20 सालों से चीनी एयरोस्पेस और मिसाइल तकनीक पर पूरी तरह निर्भर रहा है। माना जा रहा है कि इस ड्रोन के फ्लाइट कंट्रोल, सैटेलाइट नेविगेशन, कंपोजिट मटेरियल और प्रोपल्शन सबसिस्टम जैसे महत्वपूर्ण पुर्जे चीनी आपूर्तिकर्ताओं से हासिल किए गए हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक इस बात के कोई प्रत्यक्ष और ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं, लेकिन पाकिस्तान की पुरानी आदतों को देखते हुए इस चीनी कनेक्शन से इनकार नहीं किया जा सकता।

आखिर क्यों खास है ईरान का मूल ड्रोन?

ईरान द्वारा विकसित किया गया Shahed-136 और इसके विभिन्न संस्करण रक्षा की दुनिया में गेम चेंजर साबित हुए हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में इस ड्रोन ने अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाया है। अमेरिका जैसी महाशक्ति के खिलाफ भी ईरान ने इस युद्धक तकनीक का बखूबी इस्तेमाल किया है।

इस ड्रोन की प्रमुख विशेषताओं में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • इसे कामिकेज़ या आत्मघाती ड्रोन कहा जाता है, क्योंकि यह अपने साथ भारी मात्रा में विस्फोटक लेकर उड़ता है और सीधे दुश्मन के ठिकाने से टकराकर खुद को नष्ट कर लेता है।
  • इसकी वास्तविक मारक क्षमता 1000 किलोमीटर से 2500 किलोमीटर तक है।
  • इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका बेहद सस्ता होना और दुश्मन के महंगे एयर डिफेंस सिस्टम को थकाकर बेकार कर देना है।

वर्ष 2021 में पहली बार दुनिया के सामने पेश किए गए इस ड्रोन का रूसी सेना यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में बड़े पैमाने पर उपयोग कर रही है। रूस ने ईरान से बड़ी संख्या में इन ड्रोनों का आयात किया है। इन सस्ते ड्रोनों ने यूक्रेन में तैनात अमेरिकी रक्षा प्रणालियों जैसे पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया है। चूंकि ये ड्रोन बेहद सस्ते होते हैं, इसलिए इन्हें मार गिराने के चक्कर में अमेरिका के अत्यंत महंगे THAAD और पैट्रियट जैसे एयर डिफेंस सिस्टम की अरबों डॉलर की मिसाइलें बर्बाद हो जाती हैं। यहां तक कि इजरायल के साथ हुए हालिया संघर्ष में भी इस ड्रोन तकनीक ने इजरायल के अभेद्य माने जाने वाले आयरन डोम को चकमा देने में सफलता हासिल की थी, जिससे इजरायली सेना को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। अब इसी खतरनाक तकनीक का क्लोन पाकिस्तान में तैयार होना पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक नया खतरा बन सकता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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