टाटानगर स्टेशन पर डिजिटल पहचान की नई व्यवस्था, फर्जी वेंडरों पर कसेगा शिकंजा झारखंड एक घंटा पहले 2
टाटानगर रेलवे स्टेशन पर निजी एजेंसियों के कर्मचारियों को अब क्यूआर कोड वाले डिजिटल आईडी कार्ड दिए जा रहे हैं। दक्षिण पूर्व रेलवे जोन में यह व्यवस्था लागू करने वाला यह पहला स्टेशन बन गया है।

जमशेदपुर स्थित टाटानगर रेलवे स्टेशन ने सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करने के मकसद से एक नई पहल की शुरुआत की है। स्टेशन परिसर में काम करने वाली निजी एजेंसियों के कर्मचारियों को अब क्यूआर कोड पर आधारित डिजिटल आईडी कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दक्षिण पूर्व रेलवे जोन में इस तरह की व्यवस्था लागू करने वाला टाटानगर पहला स्टेशन बन गया है।

अनधिकृत आवाजाही पर लगेगी रोक

इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्टेशन परिसर में होने वाली अवैध गतिविधियों, फर्जी वेंडिंग और बाहरी लोगों की बेरोकटोक आवाजाही पर अंकुश लगाना है। अब तक कई ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें कुछ लोग रेलवे या अधिकृत वेंडर का नाम लेकर स्टेशन में घुस आते थे और यात्रियों को एमआरपी से ज्यादा दाम पर सामान बेच देते थे। कई बार यात्रियों को घटिया गुणवत्ता वाले या गलत उत्पाद भी थमा दिए जाते थे।

आईडी कार्ड में दर्ज होगा हर जरूरी ब्योरा

क्यूआर कोड पर आधारित इस डिजिटल आईडी कार्ड में कर्मचारी का नाम, फोटो, विभाग, एजेंसी और दूसरी जरूरी जानकारियां अंकित रहेंगी। रेलवे अधिकारी, स्टेशन पुलिस या संबंधित विभाग के कर्मचारी क्यूआर कोड स्कैन करके तुरंत उसकी पहचान और रिकॉर्ड की पड़ताल कर सकेंगे। इससे फर्जी पहचान पत्र के सहारे स्टेशन में प्रवेश करने वालों पर असरदार रोक लग सकेगी।

सबसे ज्यादा फायदा यात्रियों को

वेंडर राधा ने बताया कि इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यात्रियों को ही मिलने वाला है। अब केवल अधिकृत और सत्यापित कर्मचारी ही स्टेशन पर काम कर पाएंगे, जिससे यात्रियों को उचित कीमत पर सामान और बेहतर सेवाएं मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। एमआरपी से ज्यादा दाम वसूलने, गलत जानकारी देने और नकली सामान बेचने जैसी शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है।

अधिकृत वेंडरों को भी राहत

इस कदम से अधिकृत वेंडरों और निजी एजेंसियों को भी राहत मिलेगी। लंबे समय से अवैध रूप से कारोबार करने वालों की वजह से वैध वेंडरों को नुकसान झेलना पड़ रहा था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सिर्फ पंजीकृत और अधिकृत कर्मचारी ही स्टेशन परिसर में काम कर सकेंगे।

परिसर बनेगा अधिक सुरक्षित

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह पहल स्टेशन परिसर को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। अगर यह व्यवस्था कामयाब रहती है तो आगे चलकर अन्य रेलवे स्टेशनों पर भी इसे लागू किया जा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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