ट्रंप की रवानगी के बाद चीन का दांव, पास आए वॉशिंगटन के दो दुश्मन, यूरेनियम संवर्धन पर बढ़ी सरगर्मी विश्व एक घंटा पहले 2
डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के तुरंत बाद उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने एक नए परमाणु सामग्री उत्पादन केंद्र का निरीक्षण किया और हथियारों के भंडार को कई गुना बढ़ाने का संकल्प दोहराया, जिससे अमेरिका की चिंताएं बढ़ गई हैं।

डोनाल्ड ट्रंप कुछ ही समय पहले चीन की यात्रा से लौटे हैं, मगर शायद उन्हें इसका अंदाज़ा नहीं था कि उनके लौटते ही बीजिंग अपने उस साथी के साथ सक्रिय हो जाएगा, जिसे वॉशिंगटन अपना कट्टर विरोधी मानता है। अब तक ईरान के परमाणु संवर्धन पर निगाह जमाए बैठे अमेरिका को असल में इस गठजोड़ पर ध्यान देने की ज़रूरत है, क्योंकि इस ओर से दागी जाने वाली मिसाइलों की मारक क्षमता में सीधे वॉशिंगटन आता है।

किम का गुप्त परमाणु केंद्र का दौरा

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने एक नए परमाणु सामग्री उत्पादन केंद्र का निरीक्षण किया है और देश के परमाणु हथियारों के भंडार को तेज़ी से तथा कई गुना बढ़ाने के अपने संकल्प को दोहराया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, किम ने बुधवार को इस गोपनीय परमाणु इकाई का दौरा किया और वहां वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों के साथ बैठक भी की।

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने इस दौरे की जानकारी साझा की, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए केंद्र का स्थान और अन्य ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह एक यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) केंद्र है, जहां परमाणु हथियारों के लिए आवश्यक सामग्री तैयार की जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग उन ने दावा किया कि बीते पांच वर्षों में उत्तर कोरिया की हथियार-ग्रेड परमाणु सामग्री उत्पादन क्षमता दोगुनी से भी अधिक हो गई है। उन्होंने इसका श्रेय देश के परमाणु वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को दिया। गौरतलब है कि किम लगातार अपने देश के हथियारों का जायज़ा ले रहे हैं, वह भी ऐसे समय पर जब वहां चीन के राष्ट्रपति का दौरा प्रस्तावित है।

परमाणु कार्यक्रम और तेज़ करेगा उत्तर कोरिया

किम ने कहा कि दुनिया में बढ़ते सुरक्षा ख़तरों और अनिश्चित हालात को देखते हुए परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को निरंतर सुदृढ़ करना ज़रूरी है। उन्होंने साफ़ संकेत दिया कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को घटाने या रोकने के पक्ष में नहीं है।

इसी दिन परमाणु बलों को मज़बूत करने के मकसद से एक अहम बैठक भी रखी गई। इस बैठक में किम ने परमाणु हथियार कार्यक्रम को तेज़ी से आगे ले जाने हेतु नई कार्ययोजना जारी की। उन्होंने कहा कि देश ने अपनी परमाणु गतिविधियों से जुड़े अहम लक्ष्यों को नए सिरे से तय किया है और अब परमाणु शक्ति को कई गुना बढ़ाने की दिशा में काम होगा।

सरकारी मीडिया की ओर से जारी तस्वीरों में यूरेनियम संवर्धन में इस्तेमाल होने वाली भारी संख्या में सेंट्रीफ्यूज मशीनें नज़र आ रही हैं। इन मशीनों के ज़रिए परमाणु ईंधन और हथियारों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला यूरेनियम तैयार किया जाता है।

अमेरिका के लिए बढ़ती मुश्किल

विशेषज्ञों का मत है कि उत्तर कोरिया के पास पहले से ही कई परमाणु केंद्र मौजूद हैं। दक्षिण कोरिया के पूर्व एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-योंग ने अनुमान जताया था कि उत्तर कोरिया के पास हज़ारों किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम हो सकता है। माना जाता है कि महज़ 10 से 12 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला यूरेनियम एक परमाणु बम बनाने के लिए काफ़ी होता है।

किम जोंग उन का यह दौरा ऐसे दौर में हुआ है जब उत्तर कोरिया लगातार अपनी सैन्य और परमाणु क्षमताओं के विस्तार पर ज़ोर दे रहा है। इससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं उभर आई हैं। उत्तर कोरिया के पास पहले से ही ऐसी मिसाइलें हैं जिनकी पहुंच सीधे अमेरिका तक है, ऐसे में नए परमाणु हथियारों का अर्थ यही है कि चीन का यह मित्र वॉशिंगटन की परेशानी और बढ़ाने वाला है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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