राफेल को टक्कर देने का ख्वाब अधूरा, चीन ने बीच मंझधार छोड़ा पाकिस्तान, भुगतान अटका तो रोक दिए J-10C लड़ाकू विमान विश्व एक महीने पहले 25
आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान को उसके सबसे भरोसेमंद साझेदार चीन से बड़ी चोट लगी है। समय पर भुगतान न होने के कारण बीजिंग ने पाकिस्तान वायुसेना के लिए तैयार 16 J-10CE लड़ाकू विमानों की डिलीवरी पर रोक लगा दी है।

भारत के राफेल विमानों के मुकाबले अपनी हवाई ताकत को नई धार देने का पाकिस्तान का सपना फिलहाल पूरा होता नहीं दिख रहा। फ्रांस की रक्षा वेबसाइट Meta-Defense की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने पाकिस्तान को सौंपे जाने वाले 16 J-10CE लड़ाकू विमानों की डिलीवरी रोक दी है। इसकी मुख्य वजह पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक स्थिति और तय समय पर रकम न चुका पाना बताई जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने चीन के साथ कुल 36 J-10CE फाइटर जेट और करीब 250 PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइलें खरीदने का समझौता किया था। इनमें से 20 विमान पहले ही पाकिस्तान को मिल चुके हैं, लेकिन शेष 16 विमानों की खेप अब भुगतान फंसने की वजह से अटक गई है।

भारत के सामने मजबूती की थी तैयारी

पाकिस्तान J-10CE को अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण की एक अहम कड़ी मानता है। चीन का यह 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान AESA रडार और लंबी दूरी तक मार करने वाली PL-15E मिसाइल से लैस है। इस्लामाबाद को भरोसा था कि अतिरिक्त J-10CE स्क्वाड्रन हाथ में आने के बाद भारतीय वायुसेना के सामने उसकी स्थिति और पुख्ता हो जाएगी।

चीन ने आखिर क्यों पीछे खींचे कदम?

रिपोर्ट बताती है कि शुरुआती 20 विमान चीन के वित्तीय संस्थानों की ओर से दिए गए सॉफ्ट लोन के सहारे पाकिस्तान को मिले थे। मगर बाकी विमानों के लिए ‘पहले भुगतान, उसके बाद डिलीवरी’ की शर्त रखी गई थी।

पाकिस्तान अब भी 2021 से 2024 के बीच के आर्थिक संकट के असर से उबर नहीं पाया है और मौजूदा समय में देश IMF की निगरानी में चल रहा है। महंगाई, बेरोजगारी, बिजली संकट और ईरान युद्ध के चलते बढ़ती ईंधन कीमतों ने उसकी माली हालत पर दबाव और बढ़ा दिया है। यही कारण है कि चीन ने बचे हुए 16 विमानों की डिलीवरी पर फिलहाल अस्थायी रोक लगा दी है।

भारत के लिए कितनी बड़ी राहत?

विशेषज्ञों का मानना है कि J-10CE और PL-15 मिसाइलें पाकिस्तान की हवाई क्षमता को निश्चित रूप से मजबूत करती हैं, मगर इससे भारत की रणनीतिक बढ़त खत्म नहीं हो जाती। भारत के पास पहले से ही राफेल लड़ाकू विमान, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, AWACS नेटवर्क और तेजस जैसे जेट मौजूद हैं।

आने वाले वर्षों में तेजस Mk-2 और AMCA कार्यक्रम भी भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा करेंगे। यानी J-10CE की पूरी खेप मिल जाना पाकिस्तान के लिए तो फायदेमंद होता, लेकिन भारत के लिए यह किसी संकट जैसी स्थिति कभी नहीं थी।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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