बेजोड़ खुशबू और लाजवाब स्वाद से भरा बहराइच का रॉयल भोग, लखनऊ के बाजारों में बढ़ी धूम, किसानों की कमाई में उछाल उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
बहराइच का रॉयल भोग बासमती चावल अपनी अनूठी खुशबू और स्वाद के बल पर लखनऊ समेत कई शहरों में लोकप्रिय हो रहा है। एफपीओ के जरिए सीधी ब्रांडिंग और बिक्री से किसानों को बिना बिचौलिए के मोटा मुनाफा मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश का बहराइच जिला खेती-किसानी के क्षेत्र में लगातार नई पहचान बना रहा है। यहां की मिट्टी में उगने वाला रॉयल भोग बासमती चावल अब सिर्फ इसी जिले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी सुगंध दूसरे जिलों के लोगों को भी खूब भा रही है। बाजार में जिस रफ्तार से इस चावल की मांग बढ़ रही है, उससे स्थानीय किसानों की आमदनी में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

यह चावल जितना खुशबूदार है, खाने में उतना ही स्वादिष्ट और भुरभुरा भी होता है। यही खूबियां इसे ग्राहकों की पहली पसंद बना रही हैं और लोग इसे बड़े चाव से खरीद रहे हैं। बहराइच के किसान अब किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से इस चावल की बेहतरीन ब्रांडिंग कर इसे सीधे बाजार में उतार रहे हैं।

घर बैठे हो रही ब्रांडिंग और पैकेजिंग

बहराइच के हरिहरपुर रैकुंवारी गांव के प्रगतिशील किसान शुभम ने बताया कि लखनऊ की एक संस्था के सहयोग से जिले में एक विशेष किसान एफपीओ चलाया जा रहा है, जिससे इलाके के छोटे और स्थानीय किसानों को जोड़ा गया है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसानों को अपने खेत की उपज कहीं बाहर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

एफपीओ खुद ही उत्पाद की गुणवत्ता जांचता है, फिर उसकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग करके उसे सीधे बड़े बाजारों तक पहुंचा देता है। इससे किसानों का काम काफी आसान हो गया है।

40 रुपये लागत, 60 रुपये में बिक्री

शुभम के अनुसार, अगर रॉयल भोग बासमती चावल के मुनाफे की बात करें तो इसकी 1 किलोग्राम की बेहतरीन पैकिंग तैयार करने में लगभग 40 रुपये की कुल लागत आती है। इसके बाद यह पैकेट किसान एफपीओ के जरिए बाजार में 60 रुपये में आसानी से बिक जाता है। इस तरह प्रति किलो पर किसानों को सीधा और अच्छा फायदा हो रहा है। चावल की शुद्धता और खुशबू के चलते इसकी खपत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

मार्ट में सीधे पहुंच रहा बहराइच का चावल

बहराइच के स्थानीय बाजार में इस चावल की खपत करीब 200 किलोग्राम प्रति महीना है, लेकिन इसकी सबसे ज्यादा मांग राजधानी लखनऊ में है। लखनऊ में किसानों के इन उत्पादों को बेचने के लिए एफपीओ ने इंडिगो के साथ मिलकर एक बड़ा मार्ट भी शुरू कराया है। वहां सीधे ग्राहकों से लेन-देन के जरिए किसानों का उत्पाद बिना किसी बिचौलिए के अच्छे दामों पर बिक जाता है।

चावल के साथ मिल रहे मोटे अनाज

बहराइच के किसानों ने अपने इस संगठन का नाम गांव के नाम पर ‘श्री हरिहर ग्रासफील्ड प्राइवेट लिमिटेड किसान एफपीओ’ रखा है। इस केंद्र पर पहुंचकर कोई भी ग्राहक किसानों के हाथों तैयार किया गया शुद्ध रॉयल भोग बासमती चावल सीधे खरीद सकता है।

इसके अलावा इस एफपीओ के जरिए सेहत के लिए लाभकारी मोटे अनाजों का शुद्ध आटा और खेती से जुड़े कई अन्य बढ़िया उत्पाद भी वाजिब दामों पर आसानी से खरीदे जा सकते हैं। इस आधुनिक पहल से बहराइच के किसानों का जीवन स्तर लगातार बेहतर हो रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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