रक्षाबंधन विशेष: जयपुर में अपने भाई से पहले ठाकुर गोविंद देव जी को क्यों राखी बांधती हैं बहनें? जानिए इस अनोखी परंपरा का महत्व धर्म 4 घंटे पहले 3
जयपुर के आराध्य गोविंद देव जी मंदिर में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर एक बेहद अनूठी और प्राचीन परंपरा निभाई जाती है, जहां भक्त भगवान को रक्षा सूत्र बांधकर अपनी सुरक्षा की कामना करते हैं।

ठाकुर जी को पहला रक्षा सूत्र अर्पित करने की अनूठी परंपरा

राजस्थान की ऐतिहासिक नगरी जयपुर में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आस्था और भक्ति का एक बेहद ही खूबसूरत रूप देखने को मिलता है। यहां भाई और बहन के पवित्र रिश्ते के साथ-साथ भक्त और भगवान के बीच अटूट विश्वास तथा रक्षा का भाव भी इस त्योहार से गहराई से जुड़ा हुआ है। वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा के अनुसार, रक्षाबंधन के पावन अवसर पर सबसे पहले ठाकुर श्री गोविंद देव जी को राखी अर्पित की जाती है। इसके बाद ही बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं।

मंदिर में विशेष आयोजन और भव्य झांकी

इस विशेष दिन पर मंदिर प्रशासन और भक्तों द्वारा कई तरह के धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। भगवान के दरबार में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रमों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ठाकुर जी का अत्यंत मनमोहक और विशेष श्रृंगार किया जाता है।
  • भक्तों के दर्शन के लिए अलौकिक झांकी सजाई जाती है।
  • भगवान का पवित्र पंचामृत अभिषेक विधि-विधान से संपन्न होता है।
  • ठाकुर जी को विशेष पकवानों और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

सुख, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना

रक्षाबंधन के दिन सुबह के समय से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ता है। पूरा मंदिर परिसर भगवान के जयकारों और मंत्रोच्चार से गूंज उठता है। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान को राखी अर्पित करते हैं और अपने परिवार, सगे-संबंधियों व प्रियजनों की रक्षा, सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए मंगल कामना करते हैं। इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा में जयपुर की समृद्ध धार्मिक विरासत की सुंदर झलक साफ तौर पर दिखाई देती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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