चीन के साथ सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में अजीत डोभाल का बीजिंग दौरा: क्या है मुख्य एजेंडा? राष्ट्रीय राजनीति 3 घंटे पहले 10
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन के दौरे पर हैं, जहाँ वे वांग यी के साथ सीमा विवाद और LAC पर तनाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण चर्चा करेंगे। यह बातचीत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता लाने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

बीजिंग यात्रा का उद्देश्य और महत्व

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल बीजिंग पहुंच चुके हैं। इस दौरे के दौरान वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि (स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव) स्तर की वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य सीमा पर शांति बहाल करना और लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान खोजना है। यह कूटनीतिक मुलाकात इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आने वाले समय में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है। दोनों देशों के शीर्ष सुरक्षा रणनीतिकारों की यह बैठक सीमा पर जमी बर्फ को पिघलाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

LAC का आकलन और विवाद का हल

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान दोनों नेता 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर मौजूद जमीनी वास्तविकताओं का विस्तृत विश्लेषण करेंगे। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी सेना की गतिविधियों को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। विशेष प्रतिनिधियों की इस व्यवस्था का मुख्य कार्य सीमा विवाद के समाधान के लिए एक साझा ढांचा तैयार करना है। यद्यपि 2003 में शुरू हुई यह प्रक्रिया अब तक पूरी तरह से सीमा विवाद सुलझाने में सफल नहीं रही है, लेकिन दोनों पक्ष इसे तनाव कम करने के एक प्रभावी माध्यम के रूप में देखते हैं।

बातचीत के मुख्य एजेंडा और सुरक्षा मुद्दे

इस बैठक के एजेंडा में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं जिन पर दोनों पक्ष विस्तार से चर्चा करेंगे:

  • सैन्य तनाव की समीक्षा: दोनों प्रतिनिधि अक्टूबर 2024 में हुए सेना पीछे हटाने (डिसइंगेजमेंट) समझौतों की समीक्षा करेंगे और टकराव कम करने के उपायों पर जोर देंगे।
  • पेट्रोलिंग अधिकार: 2020 में गलवान घाटी में उत्पन्न संकट के बाद से बिगड़ी स्थिति को सामान्य बनाने और पेट्रोलिंग अधिकारों को बहाल करने पर मंथन होगा।
  • बॉर्डर मैनेजमेंट: वेस्टर्न सेक्टर के साथ-साथ ईस्टर्न और मिडिल सेक्टर में सीमा प्रबंधन के ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विचार किया जाएगा।
  • विशेषज्ञ समूह की भूमिका: WMCC फ्रेमवर्क के अंतर्गत काम करने वाले विशेषज्ञ समूह की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा की जाएगी, ताकि सीमा निर्धारण में शुरुआती कदम उठाए जा सकें।
  • राजनीतिक दिशा-निर्देश: वर्ष 2005 में हुए राजनीतिक पैरामीटर और गाइडिंग प्रिंसिपल्स के समझौते की मजबूती पर फिर से समीक्षा की जाएगी।

शी जिनपिंग का भारत दौरा और ब्रिक्स सम्मेलन

इस पूरी कूटनीतिक कवायद के पीछे एक बड़ा मकसद 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले एक सकारात्मक माहौल तैयार करना है। यदि चीनी राष्ट्रपति इस सम्मेलन के लिए भारत आते हैं, तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात का एक सुनहरा अवसर बन सकता है। हालांकि, अभी तक बीजिंग और नई दिल्ली की ओर से राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन उच्च पदस्थ अधिकारी उनके आने की पूरी उम्मीद जता रहे हैं। ध्यान रहे कि मोदी और शी जिनपिंग के बीच आखिरी मुलाकात अगस्त 2025 में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान हुई थी। अब देखना यह है कि क्या डोभाल और वांग की यह बातचीत सीमा विवाद को हल करने की दिशा में कोई ठोस परिणाम दे पाती है या नहीं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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