हरियाणा
एक घंटा पहले
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विचारों
बदल गई खेती की दिशा
फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव में आजकल रजनीगंधा की भीनी खुशबू हर तरफ फैली हुई है। यहां के किसान प्रेम चंद्र सैनी ने पारंपरिक धान और गेहूं की फसलों को छोड़कर रजनीगंधा की व्यावसायिक खेती को अपनाया है। यह बदलाव न केवल उनके खेतों की तस्वीर बदल रहा है बल्कि उनके मुनाफे में भी भारी इजाफा कर रहा है।
खेती और कमाई का गणित
प्रेम चंद्र सैनी के अनुसार रजनीगंधा की खेती में शुरुआती लागत थोड़ी अधिक जरूर होती है, लेकिन इसका फायदा लंबे समय तक मिलता है। एक बार पौधा लगाने के बाद करीब दो साल तक लगातार फूल मिलते रहते हैं। उन्होंने अपने खेतों में रजनीगंधा की दो किस्में लगा रखी हैं, जिनमें हाइब्रिड सिंगल और डबल वैरायटी शामिल हैं। इन फूलों की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है, जिससे अच्छी आमदनी हो जाती है।
सरकारी सब्सिडी का मिला सहारा
इस नई तरह की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी का लाभ भी दिया जा रहा है। प्रेम चंद्र सैनी ने बताया कि सब्सिडी पाने की प्रक्रिया काफी सरल है। इसमें निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होते हैं:
- खेत की फर्द
- आधार कार्ड
- बैंक खाते का विवरण
- फैमिली आईडी
आवेदन की पूरी प्रक्रिया पूरी होने के दो से तीन महीने के भीतर सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है। सरकार के इस सहयोग से अब अन्य किसान भी पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी और फूलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
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